Delving into the Marxist Historiography on Fascism at the Arvind Memorial Seminar – अरविंद मेमोरियल सेमिनार में फासीवाद पर मार्क्सवादी इतिहासलेखन पर चर्चा
*Seventh International Arvind Memorial Seminar • Day Three*

Important theoretical deliberations on Fascism, delving into the Marxist Historiography on Fascism at the Arvind Memorial Seminar on Day Three




MPNN / DESK NEWS
Hyderabad, 31st December, 2024 |
Intellectuals, activists, students, scholars gathered once again on the third day of Arvind Memorial Seminar organised by Arvind Institute of Marxist Studies (by Arvind Memorial Trust). The first hour saw a continuation of the discussions on Anand Singh’s paper, ‘The Rise of Fascism in India’, with several critical comments on rise of communalism in pre-independent India, the need to correctly identify and analyse the production relations and mode of production as Capitalist, which is central to chart out the correct proletarian strategy against fascism. Anand once again reiterated the need to wage a fierce struggle against economism, trade unionism, reformism and anarcho-syndicalism, which blunt and hinder the revolutionary movement.

This was followed by a paper presentation and discussion on ‘Marxist Historiography of Fascism: A Critical Reassessment’ by Shivani Kaul, a political activist and President of Delhi State Aganwadi Workers and Helpers Union. She shed light on the need to correctly theoretically grasp the phenomenon that is Fascism, to scientifically and objectively draw the connections between the existing politico-economic conditions and historical situation to combat it. Her paper identified the fundamental issues in the historiography of fascism, evolution of the Comintern’s understanding on fascism and analysed the arguments made by key Marxist figures like Antonio Gramsci, Palmiro Togliatti, Clara Zetkin, Amadeo Bordiga, Leon Trotsky, Nicos Poulantzas to name a few.

The second half saw the presentation by Nicolai Messerschmidt on “Postcolonial Fascism: An Analysis of Hindu Nationalism through critical and postcolonial theory”. He has critically analysed Horkheimer’s and the Frankfurt School’s analysis of fascism and raises certain pertinent questions on rise of Fascism in India.
In the coming days, about half a dozen other papers on various aspects of fascism would be presented. Activist Sunny Singh, prominent poet and activist Katyayani, and Jiselle Hannah from Australia Asia Worker Links (AAWL) would be presenting. Apart from this, many prominent activists, intellectuals, writers and professors from various states would be attending the program.
The Arvind Memorial Trust organizes the seminars on key questions and issues in the revolutionary movement for social change in memory of Arvind Singh, a brilliant left intellectual and political activist.



हिन्दुस्तान स्काउट्स के नेशनल चेयरमैन करूणाकर प्रधान ने दी शुभ कामनाएँ
हिन्दुस्तान स्काउट्स के नेशनल चेयरमैन करूणाकर प्रधान ने दी शुभ कामनाएँ

निज प्रतिनिधि
भुवनेश्वर। हिन्दुस्तान स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ.करूणाकर प्रधान ने समस्त देशवासियों को अंग्रेजी नव वर्ष के अवसर पर शुभकामनाएं दी। हिन्दुस्तान स्काउट्स एवं गाईड्स की आदिवासी इकाई के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में राष्ट्रीय प्रशिक्षण आयुक्त एस.एन.एस सुमन ने नए अकादमिक शिक्षा सत्र में आदिवासी बच्चों के स्काउट्स प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी। इस अभ्यास सत्र में प्रवेशिका पाठ्यक्रम प्रशिक्षण दिया गया। हिन्दुस्तानी बच्चों की शिक्षा के लिए हिस्कागा 1928 से कार्यरत हैं।
केन्द्रीय जोएल ओरम ने बच्चों को अपना स्नेह आशीष दिया। माननीय मंत्री कला संस्कृति एवं खेल ओडिशा सूर्यवंशी सूरज ने हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन द्वारा आदिवासी समुदाय के बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. करुणाकर प्रधान के साथ एस.एन.सुमन एन ओ सी. को धन्यवाद दिया।




2024 का अंत,नववर्ष-2025 का आगवन की सभी देशवासियों को बहुत बहुत बधाई शुभकामनाएं
2024 का अंत,नववर्ष-2025 का आगवन की सभी देशवासियों को बहुत बहुत बधाई शुभकामनाएं!
रूमसिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष लेबर पार्टी ऑफ इंडिया
2024 के अच्छे वुरे कार्यों अर्थात खट्टे मीठे स्वादों के साथ अंत हो रहा है। इसलिए नयेवर्ष 2025 में पुरानी गलतियों का सुधार एवं नववर्ष में कुछ अच्छा एवं तरक्की के लिए ठोस कदम उठाएं, नववर्ष शुरुआत के लिए बदलाव में खुद को बदलना होगा,बदलोगे,तभी आगे बढ़ोगे। ज़िन्दगी खुशहाल बनाने दुनिया में नाम कमाने, तरक्की के लिए बदलाव लाना बहुत जरूरी है।वदलाव के लिए अच्छी संगत,अच्छे लोग,अच्छा व्यवहार, ईमानदारी जैसी खूबियां आवश्यक है।
भारत के मजदूर, किसान, नौजवान भारत की पूंजीबादी, अधिनायकबादी मोदी सरकार को समझना होगा, कि मोदी के भाजपा की राजनीति के मुख्य केंद्र मोदी, अमितशाह अधिनायकबादी है। परिवारबादी दलों से लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं है? बल्कि नौकरशाही राजशाही को अधिनायकवाद से सवसे बड़ा खतरा लोकशाही को हो रहा है। लोकशाही में लोकतंत्र का बहुत बड़ा योगदान है। भाजपा जब से सत्ता में तव से लोकशाही में धर्म धार्मिकता संस्कृति इतिहास को लेकर नकारात्मकता फैला कर भारत के लोकतंत्र में मतदान मतदाता को ठगा जा रहा है। लोकशाही समाजवाद अंबेडकरवाद को हांसिए में धर्म जाति साहित्य संस्कृति के झूठ से लोकतंत्र को खत्म करके संविधान को खत्म करना मोदी का उद्देश्य है।
मोदी सरकार ने भारत में नयी संसद बनाई जिसके उद्घाटन में राष्ट्रपति को नहीं बुलाया, क्योंकि यदि उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति आतीं तो उदघाटन भी वही करतीं। भारतीय सँविधान, संसद, लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल अंग है। यदि यह संसद संबिधान को अधिनायकवाद के हाथों चला जायेगा, तो देश के गरीब मध्यम वर्ग को कभी न्याय नहीं मिलेगा।
भारत की अखंडता बंधुता एकता के लिए मोदी सरकार एक बड़ा खतरा है। भारत के जागरूक नागरिक होने से लोकतंत्र को अधिनायकवादियों से बचाया जा सकता है। जिसके लिए लिए संघर्ष करना होगा। यदि संघर्ष नहीं किया,तो भारत में राजशाही के हाथों में जा चुका है। इसलिए भारत के सरकारी उपक्रमों को बेचा जा रहा है। यदि लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो भारतीयता को मजबूत करने के लिए हिंदू हिंदुत्व धर्म की राजनीति का बिरोध करना होगा। यही भारत के हित में होगा।
pay back society to many अर्थात डा० बी०आर० अबेडकर के सामाजिक, आर्थिक राजनैतिक धार्मिक सिद्धांतों को समझने से भारत के लोगों का जीवन खुशहाल एवं सुन्दर बन सकता है। भारत के किसान,गरीब,मजदूर, नौजवानों को मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। संवैधानिक-असंवैधानिक के अंतरदुंद के अंतर को समझना होगा, भारत में गरीब अमीर के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है,जिसे पाटने के लिए राजनीति को समझकर शासक-प्रशासन प्रशासक बनकर भारत को भ्रष्टाचार एवं भेदभाव छूआछूत नफ़रत से मुक्त करने से ही इंसाफ मिलेगा।शासक वाली सोच से ही अपने हितों की रक्षा की जा सकती है।
यदि अच्छा लगता है,तो आज से लेबर पार्टी आफं इंडिया के संगठन से जुड़कर नेतृत्वकर्ता बनकर मजबूत भारत की रचना करना होगी। जिसकी कल्पना संबिधान रचनाकारों की थी। ऐसा भारत बनाने के लिए डा अंबेडकर जैसा सोचना और करना होगा।तभी आप पूजीबाद,अधिनायकवाद,अभिजातवर्ग को चुनौती देनी होगी,यही लेबर पार्टी आफ इंडिया का संकल्प है।
राजनीति,कूटनीति,रणनीति, नीति नियम नियत बुद्धि में तर्कज्ञान के लिए राजनैतिक सोच होना जरूरी है। क्योंकि राजनीति मास्टर चाबी है, जिससे तरक्की के रास्ते तो खुलते ही है। परंतु हर फील्ड के भी दरवाजे खुल जाते हैं।भारत का नौजवान धर्म-जाति से जो प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, धर्म संस्कृति इतिहास रीति- रिवाज जाति तरक्की का रास्ता नहीं है। इसलिए शिक्षा,राजनीति-लोकतंत्र संविधान डॉ बी०आर० अंबेडकर का संघर्ष को समझना होगा, तरक्की का महत्वपूर्ण रास्ता है।
सभी भारतवासियों को लेबर पार्टी आफ इंडिया की तरफ से नववर्ष के आगमन पर मध्यमवर्गीय परिवार नौजवान, भाई-बहिनों,किसानों,मजदूरों को नववर्ष में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना के साथ साथ ढेर सारी बधाई! एवं शुभकामनाएं देता हूं।
रूमसिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष लेबर पार्टी ऑफ इंडिया
जयभारत जयभीम*(8800610118)





राहुल मित्रा के ‘टेडएक्स टॉक’ ने जीता लोगों का दिल*
राहुल मित्रा के ‘टेडएक्स टॉक’ ने जीता लोगों का दिल*

MPNN DESK NEWS
प्रसिद्ध पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता-अभिनेता और ब्रांडिंग विशेषज्ञ राहुल मित्रा के रोमांचक टेडएक्स टॉक ‘क्रिएट विद करेज’ को शुक्रवार को लखनऊ में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में खूब वाहवाही मिली। इस वाहवाही की वजह यह थी क्योंकि उन्होंने दर्शकों को अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने, नाकामियों को स्वीकारने और आत्मविश्वास के साथ कुछ नया प्रयोग करने के लिए उत्साहित किया। राहुल मित्रा ने कहा कि ‘साहस सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रेरक शक्ति है, जो हमें डर का निडरता से सामना करने और हमेशा अग्रसर करने की दिशा में सक्षम बनाती है। साहस सिर्फ हमारे अंदर नहीं रहता, बल्कि हमें किसी भी तरह की चुनौती से लड़ने की ताकत देता है। साहस सफलता की कुंजी है। यह एक ऐसी ताकत है, जो हमें हर गिरावट के बाद उठ खड़े होने, दृढ़ संकल्प के साथ अज्ञात चीजों एवं भय का सामना करने के साथ अपने लिए तय सीमाओं को पार करने की शक्ति देती है।
राहुल मित्रा ने कहा कि साहस हमें असफलता को एक सबक के रूप में स्वीकार करना और हर असफलता को वापसी में बदलना सिखाता है। उन्होंने बताया कि ‘टेडएक्स टॉक्स’ विचारकों, उपलब्धियां प्राप्त करने वालों और प्रभावशाली लोगों के लिए अपने अनुभव और अंतर्दृष्टि को साझा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। साथ ही, यह हमें चुनौतियों पर काबू पाने और सफलता हासिल करने के लिए एक रोडमैप भी प्रदान करता है।

*Rahul Mittra’s Tedx Talk wins hearts*.
Renowned award-winning filmmaker-actor & branding specialist Rahul Mittra’s electrifying Tedx Talk themed ‘Create with Courage’ received huge applause in Lucknow at a packed Jaipuria Institute of Management auditorium on Friday as he inspired the audience to push boundaries, embrace failures and innovate with confidence. “Courage is not just an emotion, it’s a driving force that enables us to confront fear and move forward. It doesn’t just live in us but gives us the strength to overcome any challenge. Courage is the key to success, a force that empowers us to rise after every fall, to face the unknown with determination, and to push past the limits we set for ourselves. It teaches us to embrace failure as a lesson and turn every setback into a comeback. Choose courage over comfort,” said Rahul Mittra as hundreds of management students, corporate honchos, government functionaries & media gave him a rousing reception. Tedx Talks serve as a platform for thought leaders, achievers and influencers to share their experiences and insights, offering a roadmap to overcome challenges and achieve success.













