*मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर कलमकाराें काे दी शुभकामनाएं*

*राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को मेडिकल कैशलेस की सुविधा प्रदान करने की करी घोषणा -
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साहित्य को समर्पित पत्रिका “व्यंग्य लोक” का लोकार्पण*

आज का समय विसंगतियों से भरा है। भारत के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा कि अपराधी का धर्म देखकर अपराधी के पक्ष में लोग खड़े हो जाएं। यह बहुत बड़ी विसंगति है - लक्ष्मी शंकर वाजपयी
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राष्ट्रीय उर्दू परिषद के तत्वाधान में लखनऊ में परिचर्चा एवं मुशायरे का आयोजन

अन्य विधाओं की तुलना में कथा साहित्य जीवन के अधिक निकट है: डॉ सबीहा अनवर कहानी में विचार और शैली बहुत महत्वपूर्ण हैं: मोहसिन खान
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जलवायु परिवर्तन : हम कितने तैयार हैं?

ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार 'ग्रीन हाउस' गैस हैं! ग्रीन हाउस गैस, वो गैस होती है जो बाहर से मिल रही गर्मी या उष्मा को अपने अंदर सोख लेती है!
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भारत आर्थिक महाशक्ति की ओर अग्रसर

हरित क्रांति ने कृषि अर्थव्यवस्था का कायापलट किया।जहां तक उद्योग का प्रश्न है तो आजादी के बाद से ही सरकार भारत में औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करती रही है।
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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव सम्पन्न – अब लाहड़ी का वर्चस्व हुआ क़ायम

देश के विभिन्न स्थानों पर चलाये जा रहे प्रेस संघठनों को साथ लेकर एक फेडरेशन बनाने के प्रयास को आगे बढ़ाया जाएगा।
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मशहूर हास्य कलाकार फैयाज अहमद फैजी और विश्वविख्यात शायर पॉपुलर मेरठी की कृतियों का जश्न मनाया गया।

उन्होंने प्रख्यात हास्य कवि एवं आलोचक फैयाज अहमद फैजी की नवीनतम कृति "खंडा ज़िर-ए-लिब" और विश्व प्रसिद्ध शायर पॉपुलर मेरठी के पहले गद्य प्रयास "यादों के दरीचे" पर अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए,
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जेएनयू में एनसीपीयूएल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न

वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के इस युग में प्राथमिकताएँ तेज़ी से बदल रही हैं, ज़रूरतें बदल रही हैं, हर चीज़ का अंदाज़ बदल रहा है, इसलिए हमें अपने सोचने और महसूस करने के तरीके को भी बदलना होगा। शम्स इक़बाल
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

यह स्थापित और निर्विवाद इतिहास है कि एएमयू की स्थापना सर सैयद अहमद खान ने अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के शैक्षिक उत्थान के लिए की थी।
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राष्ट्रीय उर्दू परिषद के तत्वावधान में जेएनयू में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन

साहित्य, अतीत को वर्तमान का हिस्सा बनाता है और वर्तमान को भविष्य का हिस्सा बनाता है: प्रोफेसर क़मरुलहुदा फ़रीदी
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