आखिर क्यों लोग वोट देने क्यों नहीं निकल रहे?

ये ज्वलंत प्रश्न समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उठाए जा रहे हैं, जो चुनावों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट से उजागर होते हैं।
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राम नाम पर जारी धन रामू नहीं ले सकता – डॉ.अतुल कुमार

हिस्कागा के हरियाणा प्रांत इकाई के कुछ पूर्व पदाधिकारियों ने केन्द्रीय इकाई को भुलावे में रख कर हमनाम से जींद में स्थानीय संस्था पंजीयन कराई है।
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विकास के बहाने विनाश का गरल पीते उत्तराखंड के पर्वत शिखर* 

इस आपदा में एक आंकड़े के मुताबिक 3886 लोग या तो मारे गए अथवा लापता हुए, इसमें से मात्र 644 शव  मिले हैं। 3242 लोगों का कोई पता नहीं चल पाया।
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काँसिल की ओर त्रिदिवसीय सेमिनार – मर्ग़े बिस्तर पर कराहती उर्दू का मातम या उत्सव?

भारत सरकार का उर्दू महकमा फ़रोगे उर्दू ज़बान काउंसिल का त्रिदिवसीय सम्मेलन मर्ग़े बिस्तर पर कराहती उर्दू का मातम या उत्सव?
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राजस्थान हुकूमत का फैसला, उर्दू की गूंज को दबाने की साज़िश:

ज्ञात हो कि उर्दू प्रशिक्षण को बंद करने का निर्णय न केवल शिक्षा संस्थानों पर हमला है, बल्कि यह हमारे सभ्यता सांस्कृतिक और सांझी विरासत को खत्म करने का एक मास्टर प्लान भी है।
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साफ होनी चाहिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दिमागी गंदगी?

यदि आप सोचते हैं कि हमें ऐसे घृणित 'मजाक' को नजरअंदाज कर देना चाहिए और केवल 'वास्तविक अपराधों' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तो आप यह समझने में विफल हैं कि समाज कैसे काम करता है।
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‘विकसित भारत विजन, उर्दू लैंग्वेज मिशन’ का त्रिदिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन

विश्व मातृ भाषा का भी उत्सव है और इसका मुख्य विषय भारत की परियोजना 'विकसित भारत विज़न@47' की सरकार पर आधारित है।
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