साहित्य को समर्पित पत्रिका “व्यंग्य लोक” का लोकार्पण*
आज का समय विसंगतियों से भरा है। भारत के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा कि अपराधी का धर्म देखकर अपराधी के पक्ष में लोग खड़े हो जाएं। यह बहुत बड़ी विसंगति है - लक्ष्मी शंकर वाजपयी
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