बटन दबे, हो काम सब, सुविधा मिले अपार।
परिश्रम घटता जो गया, जड़ता दे उपहार।।
मोबाइल की लत लगी, थककर बैठे मौन।
इतना भी ना देखते, पास खड़ा है कौन।। Read More...
फ़िदा हुसैन सिर्फ आंदोलनकारी ही नहीं थे, बल्कि एक क्रांतिकारी पत्रकार भी थे। उन्होंने “चिंगारी” नामक पत्रिका निकाली, जिसमें अंग्रेज़ी हुकूमत के अत्याचारों को उजागर किया जाता था।--------------------------------------------- Read More...