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#justice

एक गोली, पंद्रह नाम और खामोशी

पूरन कुमार के सुसाइड नोट में 15 आईएएस और आईपीएस अफसरों के नाम हैं। हर नाम एक आरोप है, और हर आरोप एक आरोप: क्या इस देश में संवैधानिक शक्तियों वाला कोई भी अधिकारी अपनी जाति की बेड़ियाँ नहीं तोड़ सकता?
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सेक्स ऑब्जेक्टिफिकेशन’ के दौर में कैसे हो महिला सशक्तिकरण?

अश्लील विज्ञापनों में इस तरह का चित्रण न केवल अपमानजनक है बल्कि महिलाओं की वास्तविक स्थिति और गरिमा को भी कमज़ोर करता है।
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