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#leadership

नेताओं को वेतन और भत्तों में कटौती करनी चाहिए।

संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक नैतिकता की पहचान होगी। इस संकट की घड़ी में सभी नेताओं और मंत्रियों को कार पर चलना त्यागना चाहिए।
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लालची नेता और बिकता पत्रकार,मिलकर कर रहे देश का बंटाधार*

आजाद भारत में नेता और पत्रकारों की जिम्मेदारी* आजादी के बाद नेता का धर्म था—संविधान, समानता और देश की एकता। पत्रकार का कर्तव्य था—डर के बिना सवाल, दबाव के बिना सच और सत्ता के सामने सीधी आंख।
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