नेताओं को वेतन और भत्तों में कटौती करनी चाहिए।
संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक नैतिकता की पहचान होगी। इस संकट की घड़ी में सभी नेताओं और मंत्रियों को कार पर चलना त्यागना चाहिए।
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