आज के उपभोक्तावादी दौर में इस प्रकार की साहित्यिक-सांस्कृतिक बैठकों का अभाव हो गया है, और रहमान फाउंडेशन जैसी संस्था इस कमी को भरने का सराहनीय प्रयास कर रही है।” Read More...
पहलगाम कि घटना एक पहेली सा बनगया गया है, इत्तिहास में जब बी याद किया जाएगा, तब तब कहानी में सवाल ज़रूर किया जाएगा, आखिर सरकार ने वहां पर सुरक्षा क्यूँ नही दिया? Read More...