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#sahitykar

अनहद अहद’ में डॉ. मालती बसंत और डॉ. आबिद अम्बर का सम्मान*

'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।'
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महिला पुरस्कारों की गरिमा और निष्पक्षता पर उठते प्रश्न

आज, इन पुरस्कारों की अखंडता खोने का जोखिम है-महिलाओं की उपलब्धियों में गिरावट के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि उनकी मान्यता का मूल अर्थ धुंधला, राजनीतिकरण या पूरी तरह से खारिज हो रहा है।
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