'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।' Read More...
आज, इन पुरस्कारों की अखंडता खोने का जोखिम है-महिलाओं की उपलब्धियों में गिरावट के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि उनकी मान्यता का मूल अर्थ धुंधला, राजनीतिकरण या पूरी तरह से खारिज हो रहा है। Read More...