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#UrduShayer

बशीर बद्र को आख़िरी सलाम -उर्दू अदब का एक रोशन चिराग बुझ गया।

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,** जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।" ** जी बहुत चाहता है सच बोलें,** **क्या करें हौसला नहीं होता।"
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