RWCW की ओर से ऑल इंडिया मुशायरा एवं सम्मानित समारोह

उर्दू को बढ़ावा देने के लिए मुशायरे का कर्यक्रम समाज को आकर्षित कर समाज को भाषाई सौहार्द में पिरोने का एक मंत्र है - अनीस फातिमा

मुशायरा हिंदुस्तान की तहज़ीब तमद्दुन को जहां दर्शाता है वहीं समाज को एक दूसरे जोड़ कर आपसी भाईचारा को मजबूत बनाता है। मुशायरा उर्दू का वह चाशनी जिसे सुनने के बाद लोग महफ़िल नहीं छोड़ते बल्कि जुड़ कर अपनी ज़िंदगी उर्दू मुशायरा बनाने की कोशिश में लग जाते हैं।

ऑल इंडिया मुशायरा और सम्मानित समारोह।

एस. ज़ेड. मलिक

मुशायरा हिंदुस्तान की तहज़ीब तमद्दुन को जहां दर्शाता है वहीं समाज को एक दूसरे जोड़ कर आपसी भाईचारा को मजबूत बनाता है। मुशायरा उर्दू की वह चाशनी जिसे सुनने के बाद लोग महफ़िल नहीं छोड़ते बल्कि जुड़ कर अपनी ज़िंदगी उर्दू मुशायरा बनाने की कोशिश में लग जाते हैं।

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उर्दू को बढ़ावा देने के लिए मुशायरे का कर्यक्रम समाज को आकर्षित कर समाज को भाषाई सौहार्द में पिरोने का एक मंत्र है – अनीस फातिमा

पिछले दिनों 16 फरवरी को उर्दू अकादमी के सौजन्य से तथा “राइट वे वीमेन एंड चिल्ड्रन वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन”(RWCW) के तत्वाधान में एवं सुलेमान सिद्दीकी ट्रस्ट के सहयोग से RWCW की सुश्री अनीस फातिमा की अध्यक्षता में, दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया ऑडिटोरियम, नई दिल्ली, में “कुल हिंद मुशायरा और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया इस अवसर पर कई जाने-माने शायरों और जाने-माने हास्य कवियों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए RWCW की अध्यक्षा सुश्री अनीस फातिमा ने अपनी संस्था का परिचय एवं मुशायरा कराने का उद्देश्य को उजागर करते हुये कहा, हमारा मकसद है उर्दू को बढ़ावा देना, मैं समझती हूं कि उर्दू जो हर समुदाये के आर्निवार्य होना चाहिये, “मुशायरा” उर्दू से निकली हुई वह ध्वनि है जिसे सुनने के बाद लोग और महफ़िल की ओर ओर अपने आप आकर्षित होने लगते हैं। उर्दू एक ऐसी भाषा है जिसमे मिठास है, मानवता को आपस मे चिपकाने का गुण है।

मुशायरा हिंदुस्तान की तहज़ीब तमद्दुन को जहां दर्शाता है वहीं समाज को एक दूसरे जोड़ कर आपसी भाईचारा को मजबूत बनाता है। मुशायरा उर्दू की वह चाशनी जिसे सुनने के बाद लोग महफ़िल नहीं छोड़ते बल्कि जुड़ कर अपनी ज़िंदगी उर्दू मुशायरा बनाने की कोशिश में लग जाते हैं।

उर्दू को बढ़ावा देने के लिए मुशायरे का कर्यक्रम समाज को आकर्षित कर समाज को भाषाई सौहार्द में पिरोने का एक मंत्र है। 

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इस अवसर पर वहां उपस्थित आदरणीय कारी फजलुर रहमान साहिब (डायरेक्टर इकरा हम्माद और नात अकादमी) दिल्ली। मुख्यातिथि (माननीय कारी अब्दुल कादिर साहिब डायरेक्टर अल-अमीन एजुकेशन ट्रस्ट) विशिष्ट अतिथि (पूर्व स्मिथ कमिश्नर ऑफ कमर्शियल टैक्स) गेस्ट ऑफ ऑनर (डॉ. नदीम अहमद, करोड़ी मिल कॉलेज) कविता: कारी मुहम्मद अफाक साहिब, हजरत शायर: मतीन अमरोहवी – दर्द अल-हलवी – रईस मुजफ्फर नगरी – मोइन कुरैशी – मकबूल जफर (जबलपुर) जब्बार शारिब (ग्लोबल) मकसूद शाह दीवान कन्वीनर: शायर: शाकिर देहलवी – शहादत अली निजामी – इजहार सिद्दीकी – इमरान फारूकी – उमर फारूक मोइन अख्तर अफसर बुरहान पुरी – कलाम बिजनूरी – अका तकी शेरकोई बिलाल – आबिद मालती शेरकोई – डॉ. फुरकान गौहर – स्कॉलर किरत पुरी, अकील अंसारी – अरशद कमर, फाखिर बिजनूरी दर्द देहलवी साहिब, कलाम बजनूरी साहब, इन पांचों सज्जनों ने सेमिनार को सफल बनाने में अपनी जिम्मेदारी दिखाई। कार्यक्रम की विदाई की रस्म संस्था की (संरक्षक) अनीस फातिमा साहिबा ने की। संस्था के सदस्य अबरार अहमद, शोएब अहमद, मुहम्मद हारून सैफी, मुहम्मद जावेद अंसारी, सी. पी. सिंह, सोनी मिश्रा, राम किशोर, ने अपने अपने कवीता पढ़ते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और संस्था के कार्यों की जम कर सराहना की, तथा संस्था के सदस्यों ने अपनी मेहनत और सच्ची लगन से समारोह में चार-चांद लगा दिया।

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