आरएसएस प्रमुख सुनिश्चित करें कि हिन्दू कौन है? और हिन्दू राष्ट्र क्यूँ?
आरएसएस प्रमुख ने हिन्दुराष्ट्र के नाम पर एक बार फिर गुमराही का जाल फेंका
भारतीय समाज को हिन्दू के नाम पर एक बार फिर गुमराह करने की कोशिश की!!! हिन्दू राष्ट्र पर ब्राह्मणों का क़ब्ज़ा हिंदुओं के लिये दुर्भग्यपूर्ण है। तब यह हिन्दू राष्ट्र कहना उचित नहीं है, हिन्दू के नाम पर राष्ट्र और क़ब्ज़ा ब्राह्मणों, सवर्णों का?? यह कैसा खेल है???


ऐसे और खबरों के लिये नीचे क्लिक करें
👇👇👇👇👇
Satya pal malik ek kahaani – कुछ अनकही कुछ अन सुनी – जो कहना सके और चलेगये😭
भागवत ने यह भी कहा कि अलग विचारधारा होना कोई अपराध नहीं है। आरएसएस पूरे समाज को एकजुट करने में विश्वास रखता है। मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में बताते हुए कहा कि इसकी आत्मा उसकी प्रार्थना की आखिरी पंक्ति में है- भारत माता की जय। उन्होंने कहा कि यह हमारा देश है, और हमें इसका सम्मान करना चाहिए और इसके लिए काम करना चाहिए। आरएसएस की स्थापना भारत के लिए हुई थी। यह देश के लिए काम करता है, और इसका उद्देश्य भारत को विश्वगुरु बनाना है। अब समय आ गया है कि भारत दुनिया में अपना योगदान दे।
आरएसएस प्रमुख के यह वाक्य प्रसंगिक है, मुख पर राम राम बगल में छुरी – यदि इनकी दृष्टि में हिन्दू राष्ट्र समावेशी और समतावादी है, तो यह शुद्र शब्द की उतपत्ति क्यूँ की गई, और फिर उनका अधिकार किसी मंदिरों पर क्यूँ नहीं? शूद्रों को मंदिरों में जाने से मंदिरों को कहीं गंगा जल क्यूँ धोया जाता है, और फिर किसी शुद्र को आज तक कोई पुजारी या कथावाचक बनने अधिकार क्यूँ नहीं है?

