पूर्व प्रधानमंत्री का प्रतीक दिवस है 25 दिसम्बर

यह दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो अपने दूरदर्शी नेतृत्व, नैतिक राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे।

25 दिसंबर उन वीर सैनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों और असंख्य गुमनाम नायकों के बलिदान की भी स्मृति कराता है, जिन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए अपने प्राणों तक की आहुति दी।

25 दिसंबर: नेतृत्व, बलिदान, सुशासन एवं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक दिवस

डॉ. अनुभा पुंडीर
एसोसिएट प्रोफेसर
GEHU (ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी)

नई दिल्ली, 25 दिसंबर — 25 दिसंबर भारत की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह दिन नेतृत्व, बलिदान, सुशासन, आध्यात्मिक मूल्यों तथा समावेशी परंपराओं का सार प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर डॉ. अनुभव पुंडीर ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से भारत की गौरवशाली विरासत से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

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यह दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो अपने दूरदर्शी नेतृत्व, नैतिक राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी स्मृति में 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही तथा जन-केंद्रित शासन के महत्व को रेखांकित करता है।

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25 दिसंबर उन वीर सैनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों और असंख्य गुमनाम नायकों के बलिदान की भी स्मृति कराता है, जिन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए अपने प्राणों तक की आहुति दी। उनके त्याग और साहस के कारण ही भारत की स्वतंत्रता, एकता और गरिमा सुरक्षित है।

इस दिन से जुड़ी तुलसी पूजा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण आयाम है। तुलसी पवित्रता, सहनशीलता, आत्म-संयम और आत्म-शासन का प्रतीक मानी जाती है। यह हमें स्मरण कराती है कि समाज में सुशासन की स्थापना से पूर्व व्यक्ति का नैतिक और आत्मिक अनुशासन आवश्यक है।

25 दिसंबर को क्रिसमस पर्व भी मनाया जाता है, जो भारत की समावेशी सभ्यता, सह-अस्तित्व और पारस्परिक सम्मान की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है।

युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. पुंडीर ने कहा कि “जय हिंद” का उद्घोष तभी पूर्ण होता है जब हम कृतज्ञता के साथ “जय सैनिक” भी कहते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से प्रेरणा लें, बलिदानों का सम्मान करें और मूल्य-आधारित, जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

इस प्रकार, 25 दिसंबर केवल स्मरण का दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, प्रेरणा और संकल्प का दिवस बनकर उभरता है।

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लेखक परिचय
डॉ. अनुभा पुंडीर
एसोसिएट प्रोफेसर
GEHU (ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी)

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