चुनाव आयोग भाजपा के अधीन ? पश्चिम बंगाल में लगभग साढ़े तीन करोड़ मुसलमानों के फ़र्ज़ी मृतक, एवं शिफ्टिंग के नाम पर काटे।

वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव आयोग का बुलडोज़र मुसलमानो के फ़र्ज़ी, मृतक और शिफ्टिंग के नाम पर चला? 

बंगाल में 90 प्रतिशत मुसलमानो का नाम मतदाता सूची से कटवा कर मतदान कराया गया – इसका मतलब भाजपा को सीधा सीधा बंगाल की सत्ता पर क़ब्ज़ा के संकेत,

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वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव आयोग का बुलडोज़र मुसलमानो के फ़र्ज़ी, मृतक और शिफ्टिंग के नाम पर चला? 

बंगाल में 90 प्रतिशत मुसलमानो का नाम मतदाता सूची से कटवा कर मतदान कराया गया ।
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एस. ज़ेड. मलिक

इस मे कोई शक नहीं होना चाहिए कि 2019 के बाद के बाद से अब तक चुनाव आयोग पूर्णरूप से भाजपा सरकार के अधीन कार्यरत है, चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर जहां जनता भारी पड़ जाती है वहां वहां सरकार और चुनाव आयोग दोनो पस्त हो जाते हैं, जैसे दक्षिण भारत में केरल, तमिलनाडु, एवं अन्य – झारखंड, उड़ीसा, उत्तरभारत में हिमाचल कश्मीर, पंजाब, जैसे राज्यों में। भाजपा और चुनाव आयोग दोनो पीएसटी पड़ जाते हैं। इसी प्रकार यह दोनों आज वेस्ट बंगाल में पीएसटी दिखाई दे रहे हैं।
    वेस्ट बंगाल में भाजपा ने फिर वही फॉर्मूला अपना जो राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, और बिहार में अपनाया था, यानी “साम, दाम, दण्ड , भेद”, – अब ऐसे में सांप भी मर जाये और लाठी न टूटे, “चित भी मेरी पट भी मेरी” यह सभी कहावत अब भाजपा पर आम सी हो गई है, आरएसएस का एक भी  मंत्र है “हिन्दू राष्ट्र” हिन्दू राष्ट्र ऐसे तो बना सकते नहीं, जब तक लोकतंत्र, संविधान पर आधारित है, और संविधान में न तो हिन्दू राष्ट्र का कोई आर्टिकल है और उसमे हिन्दुराष्ट्र के नाम से कोई आर्टिकल जोड़ सकते हैं और न कोई उसमे संशोधन ही कर सकते हैं। फिर ऐसे में क्या करें एनआरसी, और सीएए, एक अलग से क़ानून पारित कर मुसलमानो को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के लिए एक फॉर्मूला इजाद तो किया उसमे भी फेल हो गये, शाहीन बाग प्रोटेस्ट ने इन्हें विश्व भर में बदनाम कर दिया, भारत मे मुसलमानो को दुश्मन सरकार ने साबित कर दिया, जिससे भाजपा सरकार को यूएनओ में काफी फज़ीहत झेलनी पड़ी, तब यह बैकफुट आ गए और उस एनआरसी और सीएए, को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा।
सरकार द्वारा भारत मे मुसलमानो दोयम दर्जे की नागरिकता देने का SIR एक नया फॉर्मूला:-
 
 अब भाजपा सरकार ने मुसलमानो को दोयम दर्जे नागरिक बनाने का एक नया फॉर्मूला का आविष्कार किया, एसआईआर, “SIR” यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण है। अब इस पुनरीक्षण के बहाने मुसलमानो फिर एक बार टारगेट करने की कोशिश जारी है, लेकिन इसमें भी भाजपा सरकार की मुसलमानो के प्रति सौतेला रवैया भी विश्व पटल पर स्प्ष्ट दिखाई दे रहा है, जबकि अभी भारत के यह आंतरिक मामले पर यूएनओ और विश्व निगरानी समिति दोनो इसलिये चुप हैं कि इस समय ईरान इज़राइल अमेरिका वार छिड़ा हुआ है, उसका फायदा इधर भारत सरकार की मनुवादी टीम पूरी तरह से उठाने की कोशिश कर रही है, जबकि भारत मे स्थानीय समाजिक संस्थाए अपने अपने दायरे में सक्रिय है, जिसका नतीजा आये दिन सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन और जगह जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की जनविरोधी नीतियों का प्रमाण के साथ प्रदर्शित कर उनका बखान किया जा रहा है। ईमानदार पत्रकार लेखक, कवी, सभी सरकार की आलोचना कर रहे हैं लेकिन भारत सरकार बेरशर्मी का मजबूत लीबादा ऐसे उड़ रखा है कि उसको किसी के आलोचना का एक भी छीटा पड़ ही नहीं सकता, खुले आम निर्लज्जता के साथ अपने आलोचकों को अपनी पुलिस से पकड़वा कर उसे जेल में या रेल में या मौत के खेल में धकेल दे रही है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा द्वारा एस आई आर के बहाने सत्ता पर क़ब्ज़ा की कोशिश।
 अब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकार बनाने के लिये जिस प्रकार के फार्मूले का प्रयोग किया है वह बहुत ही दुखदाई चिंतनीय तथा चौकाने वाला है। आइये पहले जानते एसआईआर के द्वारा भाजपा क्या खेल खेने जा रही है – इस खेल राज़ फाश कर रही है एक सामाजिक संस्था ——
Association for Protection of Civil Rights, इस संस्था के सक्रिय कार्यकर्ता मिस्टर नदीम खान, और प्रोफेसर अपूर्वा जिन्हों ने 04 अप्रैल 2026 से लगेतार अब तक तीन जगह पर जागरूकता अभियान के तहत अपनी सर्वे रिपोर्ट मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर दिखा कर समाज को फासीवादी शक्तियों से लड़ने के लिये एक जूट करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि शिक्षित बुद्धिजीवी वर्ग अपने ऐशो आराम और सरकारी गुलामी छोड़ने को तैयार ही नही है। आइये दीखिये आई पी सी आर के सर्वे की रिपोर्ट – जिससे पता चलता कि भाजपा ने वेस्ट बंगाल में कैसे ममता बनर्जी की सरकार को पलटने को कोशिश की ? भाजपा ने अपने एस आईआर के बहाने   95 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करवा दिया इसमे अब कोई दो राय नही की सरकार ही अब हिंदुत्वादी मनुवादी मानसिकता के तहत सब अधिक मुसलमानो को टारगेट कर रही है।
अब यह चौकाने वाली बात बिल्कुल भी नही है बल्कि भाजपा के पिछले चुनाव हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की याद ताजा कर दी है, उन चुनाव का लेखा जोखा आईडीआर एक संस्था ने भाजपा के वोट्स चोरी वाले पूरा बैमानी का खुलासा किया था। भाजपा कैसे जिनियन वोटर्स को हटा कर फ़र्ज़ी वोटर्स को जोड़ा और हरियाणा , राजस्थान, और दिल्ली जीता, उसी प्रकार अब पश्चिम बंगाल में भी एक ओर चुनाव आयोग के माध्यम से हर ज़िला में अपने डीएम, एसडीएम, और एसपी, डीएसपी को बहाल कर पोलिंग बूथ को अपने क़ब्ज़े ले कर सारी फ़र्ज़ी मिशनरी अपने गुलामो के अंदर रख कर अंदर खाने बदलने का काम किया जा रहा है, साम, दाम, दण्ड, भेद, हर हाल में बंगाल जीतना है, कुछ तथ्यात्मक आंकड़े आपके सामने दिये जा रहे हैं।
2026 वेस्ट बंगाल चुनाव के लिए वोटर लिस्ट से नाम कटने का स्पेसिफिक डेटा:-
चुनाव अप्रैल 2026 में है। चुनाव आयोग ने अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 तक *Special Intensive Revision (SIR)* की। इसके बाद जो डेटा सामने आया:
1. कुल कितने नाम कटे?
– 9.1 करोड़ नाम हटाए गए यानी कुल वोटर 7.66 करोड़ से घटकर ∼6.75 करोड़ हो गए।
– ये बंगाल के कुल वोटरों का *लगभग 12%* है।
– EC ने कहा ये नाम “डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य” वोटरों के थे।
2. धर्म के हिसाब से कितने नाम कटे?
EC धर्म-आधारित डेटा नहीं देता। लेकिन TMC और रिसर्च संस्थानों के बूथ-लेवल एनालिसिस के अनुसार: cdda
समुदाय  कटे हुए नाम कुल का % बंगाल में                                                               आबादी %
हिंदू     57.47 लाख          63%      70-72%
मुस्लिम  31.1 लाख          34%      25-27%
इसका मतलब:- संख्या में सबसे ज्यादा हिंदू वोटर कटे, लेकिन आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोटर ज्यादा कटे। मुस्लिम 27% आबादी हैं पर 34% नाम कटे।
3. सबसे ज्यादा असर कहाँ पड़ा?
 
मुस्लिम-बहुल जिले और सीटें – मुर्शिदाबाद 4.6 लाख नाम कटे।
शमशेरगंज सीट पर 1,08,400 में से 74,775 नाम कटे।
 जिला कुल 4,55,137 नाम कटे।
 सबसे ज्यादा मालदा:- 2.4 लाख नाम कटे।
उत्तर 24 परगना:- 3.3 लाख नाम कटे। मटुआ-बहुल इलाकों में भी हजारों नाम कटे।
नंदीग्राम:- मुस्लिम 25% आबादी, पर 95% से ज्यादा कटे हुए नाम मुस्लिमों के।
भवानीपुर:- मुस्लिम 20% आबादी, पर 40% कटे हुए नाम मुस्लिमों के। “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” कैटेगरी में 52% मुस्लिम थे।
– कोलकाता पोर्ट-: 65,000 नाम कटे, 70% से ज्यादा मुस्लिम।
– चौरंगी:- 75,000 नाम कटे, 35% गिरावट। यहां 37% वोटर मुस्लिम थे।
4. विवाद क्यों हुआ?
1. “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” LD*: बंगाल में ही लागू हुई। रिसर्च कहती है इसमें मुस्लिम बहुत ज्यादा थे, जबकि “ASDD” लिस्ट में अनुपात ठीक था। आरोप है कि AI से मुस्लिम नाम टारगेट हुए।
2. “अंडर एडजुडिकेशन”: 60.06 लाख वोटर इस कैटेगरी में डाले गए। 27 लाख फाइनल में कटे। मालदा- 8 लाख, मुर्शिदाबाद- 11 लाख एडजुडिकेशन में थे।
3. कोर्ट/ट्रिब्यूनल:- 19 ट्रिब्यूनल बने – 34 लाख अपील आईं, लेकिन वोटिंग से पहले सिर्फ 1,468 नाम वापस जुड़े, 6 नाम और कटे, जिनमें 5 मुस्लिम थे।
5. सभी पक्षों का दावा:-
TMC/CPI(M) को “एल्गोरिदम से बाहर करना है- टारगेटेड है, खासकर मुस्लिम और महिलाओं के वोट काटे। NRC से जोड़ा।
– BJP के अनुसार, SIR से “क्लीन लिस्ट बनी, फर्जी/घुसपैठिए वोटर हटे हैं।
– EC के अनुसार, नाम मृत्यु, शिफ्ट होने, डुप्लीकेट होने पर नाम कटे हैं – 24 लाख मृत, 20 लाख शिफ्ट, 1.38 लाख डुप्लीकेट वोटर्स थे।
खेल और और भी पेचीदा है जिसे समझने की आवश्यकता है – मीडिया के सामने चेकिंग करा कर मशीनें बूथों पर रखी जायेगी उसमे जिन वोटर्स के वोट्स पड़ेंगे वह भाजपा के बनाये गए वोटर्स होंगे, दूसरी ओर अपने अधिकारियों को नौकरी से निकालने और जेल में डालने की धमकी दे कर मुसलमानो का वोटर लिस्ट से नाम हटवा कर फ़र्ज़ी वोटर जोड़वाना वैसे जिनियन वोटर्स विशेष कर मुस्लिम समुदायेओं को तो पहले से ही भाजपा के अधिकारियों ने लिस्ट से नाम काट दिया है, वह अब न वोट्स दे सकते हैं, और न वह अब चैन से अपने घर मे ही नागरिक बन कर रह सकते हैं, वह हमेशा डर के साये में जीवनयापन करेंगे।
बहरहाल –  सक्रिय समाजिक विश्लेषक मिस्टर नदीम ने जो आंकड़े दिये वह बेहद अफसोसनाक और चिंतनीय है, भाजपा ने अपने विशेष अधिकारियों द्वारा विशेष कर आम मुस्लिम मतदाताओं के साथ साथ मुस्लिम बीएलओ का भी नाम उनके वोटर लिस्ट से कटवा दिये हैं, यह एक बेहद द्वेषी और दुराग्रही मानसिकता का परिचय दिया है, और फिर बंगाल सरकार बेचारी मूकदर्शक बनी हुई है।
नदीम के एक रिपोर्ट के अनुसार एक एक जिले से लगभग कहीं से 400000, चार लाख तो कहीं से साढ़े चार लाख, पांच लाख, तो कहीं से आठ, आठ लाख, मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से काटा जा चुका है। भारत की विडंबना कहे या भारतीय मुसलमानो का दुर्भगय, या भाजपा सरकार की हठधर्मी??
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