भारत सरकार द्वारा पारित नये क़ानून भारतीय नागरिकों के लिये कितना लाभदायक?
इन कानूनों के कार्यान्वयन से हमारी आपराधिक व्यवस्था में सुधार होगा"।
नए कोड में 356 प्रावधान हैं, जिनमें से 175 प्रावधान पुराने आईपीसी से लिए गए हैं, लेकिन कुछ बदलावों के साथ कुछ प्रावधानों को हटा दिया गया है और आठ नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
राष्ट्रीय उर्दू परिषद में ‘नए तीन आपराधिक कानूनों’ पर विशेष उपदेश

MPNN-AINA INDIA
नई दिल्ली – तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में परिचित और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रमोशन परिषद, भारत सरकार जसोला नई दिल्ली, के मुख्यालय में एक विशेष सभा का आयोजन किया गया। जिनमे भारत सरकार द्वारा जारी आपराधिक तीन नये कानूनों के बारे में जागरूक किया गया। इस अवसर पर क़ानून विशेषज्ञ ख्वाजा अब्दुल मुंतक़ीम ने परिषद के सभी कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस नए कानून को हर नागरिकों को जानना आवश्यक है, उन्होंने ने बल देते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम वास्तव में भारतीय दंड संहिता, आपराधिक संहिता और साक्ष्य अधिनियम का एक चीरपरिचित सुबूत हैं।

भारतीय नया संहिता 2023 को पहले भारतीय दंड संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 को दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023 को भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि साक्ष्य अधिनियम (इंडियन एविडेंस एक्ट) सिर्फ आपराधिक मामलों में ही नहीं बल्कि सिविल और आपराधिक दोनों मामलों में लागू होता है।
ख्वाजा अब्दुल मुंतक़ीम ने सभा को इन तीन नए कानूनों के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में आश्वस्त किया।
इस अवसर पर उन्होंने सभा मे उपस्थित लोगों के सवालों के संतोषजनक जवाब भी दिये। उन्हों बताया कि “इन तीन कानूनों के बारे में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि ये कानून हमारे समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण हैं और इन कानूनों के कार्यान्वयन से हमारी आपराधिक व्यवस्था में सुधार होगा”। अपने भाषण में ख्वाजा अब्दुल मुंतकुम ने यह भी कहा कि आईपीसी में 511 प्रावधान थे, नए कोड में 356 प्रावधान हैं, जिनमें से 175 प्रावधान पुराने आईपीसी से लिए गए हैं, लेकिन कुछ बदलावों के साथ कुछ प्रावधानों को हटा दिया गया है और आठ नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय उर्दू परिषद की सहायक निदेशक (अकादमिक) डॉ. शमा कौसर यज़दानी की परिचयात्मक टिप्पणियों से हुई। इस मौके पर उन्होंने मशहूर न्यायविद ख्वाजा अब्दुल मुंतकम और तीन नए कानून पेश किए. इस अवसर पर राष्ट्रीय उर्दू परिषद के सहायक निदेशक (प्रशासन) श्री मुहम्मद अहमद, अनुसंधान अधिकारी श्री शाहनवाज मुहम्मद खुर्रम, अनुसंधान अधिकारी श्री एख्ता अहमद, अनुसंधान अधिकारी डॉ. मुसरत एवं सुश्री जीशान के अतिरिक्त परिषद के सभी सदस्यों के उपस्थित रहे।


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