रमी की तरह खेला जा रहा है भारत के लोकतंत्र को

राहुल गांधी के द्वारा सदन में सत्तारूढ़ का मुखौटा उतारने के बाद अब ऐसा प्रतीत हो रहा कि सत्तारुढ़ देश को एक रामी की तरह खेल रहा।

शायेद डोभाल को भी डर है कि कहीं उन्हें भी हेमंत करकरे की तरह अपनी कुर्बानी न देनी पड़े। बड़े ही होशियारी से डोभाल मोदीशाके साथ रामी खेल रहे हैं

राहुल ने मोदिशाह टीम का मुखौटा उधेड़ा  

एस. ज़ेड. मलिक

नई दिल्ली – पिछले दिनों सदन में जिस प्रकार वर्तमान कांग्रेस के युवा चाणक्या राहुल गांधी मोदिशाह का दिया हुआ नाम पप्पू ने मोदिशाह टीम का मुखौटा उधेड़ा है – कोई सपने भी नहीं सोंच सकता था कि मोदिशाह भारत के विशालकाय लोकतंत्र को मात्र 6 लोगों से कंट्रोल कर रहे हैं? 🤔🤔🤔
जबकि डोभाल की संदिग्ध भूमिका वरिष्ठ पत्रकारों से छुपी हुई नहीं थी, और दबी ज़बान में ही सही, कुछ लोग तो चाहे सोशल मीडिया पर ही सही, छोटे समाचार पत्रों ही सही लिख रहे थे, लेकिन उनकी न कोई सुनवाई थी और न उन छोटे पत्रकारों की कोई सुनने वाला ही है। 
बहरहाल – सरचालक संघ मोहन भागवत जी जिन्ह झूठा इत्तिहास गढ़ने में महारत हासिल है, जिनका हिंदुस्तान के उत्तर भारत और दक्षिण भारत के अलावा पूरबी भारत के कुछ जगहों पर आरएसएस की शाखा ने अपनी पकड़ बना रखी है, जो ज़मीनी कमांड सम्भालते हैं अपने शाखाओं को कंट्रोल करते हैं, जिनका लोगों को गुमराह करना दंगा क़रवाना, देश मे अफरातफरी का माहौल बनाना इनका यह मुख्य कार्य है, जैसे चुनाव से पहले नागपुर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के इस चुनाव में कांग्रेस को आरएसएस ने समर्थन देने का एलान किया था, यह सिर्फ कांग्रेस को खुशफहमी में डालने और राहुल को अपनी ओर आकर्षित करने वाला एक षड्यंत्रनुमा दाना छीटा गया था, ताकि राहुल नागपुर पाहुँच जायें और इनकी फोयो मीडिया में उछाल दें कि राहुल आरएसएस के आगे झुके, इससे कांग्रेस के कैडर पर असर पड़े और कांग्रेस बदनाम हो जाये लोगों का कांग्रेस से लोगों का मोह भंग हो जाये। इधर हँगावा खड़ा हो उधर मोदीशाह देश की कोई न कोई संपत्ति का सौदा करें।
दूसरे मुखौटा , अजित डोभाल – इनका काम देश की सारी रक्षा, सुरक्षा, एजेंसियां और विदेश नीतियो के मामले पर पूरा कंट्रोल। किसे कब कहां कैसे डराना है जो हाँथ जोड़ कर भाजपा के चरणों मे गिरे। यह डोभाल तय करते हैं। इसलिये की ईडी, एनआईए, सीबीआई, आईबी, इनकमटैक्स और इलेक्शन कमीशन यह सभी अंडरकंट्रोल डोभाल और डोभाल अंडरकंट्रोल इन मोदिशाह। शायेद डोभाल को भी डर है कि कहीं उन्हें भी हेमंत करकरे की तरह अपनी कुर्बानी न देनी पड़े। जिस प्रकार गुजरात के एसपी आज तक जेल की सलाखों के पीछे हैं, कहीं उन्हें भी .? इसी लिये डोभाल को इनके पत्ते खेलने पड़ रहे हैं।
तीसरे – अदानी और अम्बानी – जो (80) अस्सी पैसे के ब्याज पर 20 पैसा से मोदीशाह के खजाने की पूर्ति करते हैं। 
बाकी के ताश के कुछ अहम पत्ते जैसे मुन्ना यानी एक्का, बादशाह , बीवी यानी रानी, गुलाम यानी जे, फिर दहला फिर नहला फिर अट्ठा, सत्ता, छक्का, पंजा, चौवा, तिग्गी, दुग्गी यह ताश के बावन पत्ते जिसका सत्ता में बैठे पांच और सत्ता बाहर का एक जो आज सरकार में न होते हुए भी पूरे सरकार पर हावी है, और छह लोग ताश के बावन पत्तो का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसमे एक्का निर्मला सीतारमण फिनांस मनिस्टर – बादशाह , विजयशंकर विदेश मंत्री, बीवी यानी रानी – राजनाथ सिंह, और गुलाम कभी भी किसी पर भी रख कर उसे खेल लिया जाता है। 
अब आइये बताते हैं –  इनका खेल 2014 में सत्ता में आने बाद शुरू हुआ,  सबसे पहले अपने विरोधियों की कमर तोड़ना इनका में मक़सद बन गया ताकि पांच वर्षों तक विरोधी सारः न उठा सकें, इस नीती को बनाने में भी आरएसएस सुप्रीमों का मुख्य किरदार रहा – नोट बंदी – झूठा प्रचार, काला धन विदेशों से वापस लायेंगे, 15 लाख हर भारतीय के खाते में डाले जायेंगे, हर वर्ष 2 करोड़ युवाओं को रोजगार दिया जायेगा, इन सभी झूठे प्रचार के बीच अचानक से नोट बंदी कर के पुरे हिंदुस्तान में हाहाकार मचा दिया, कितने लोगों की लाइन में लगे लगे मौत हो गई। यह सिसला लग भग तीन महीने चला फिर विपक्षों द्वारा रोजगार और काला धन लाने की मांग उठने लगी तो सर्जिकल स्ट्राइक कर वाह वाही लूट लिया मीडिया को मैनेज कर लिया खूब झूठा प्रचार करवाया, और उसी दरमियान जब जनता संगठित होने लगी राममंदिर का मुद्द खड़ा कर दिया, सुप्रीम कोर्ट के एक बेंच को खरीद लिया राम मंदिर का एक तरफा फैसला दिलवा दिया और उस जज को राज्यसभा दे दिया और उक्त भूमि पर शिलान्यास करवा कर फिर से वाह वाही लूट ली फिर अन्धविश्वासीय जनता काला धन और रोजगार भूल गयी, इसी प्रचार प्रसार और देश में हंगामा खड़ा करवा कर, अडानी से एलआईसी कम्पनी  रेलवे और हवाई अड्डा का सौदा कर दिया और दुसरीं तरफ अम्बानी को कच्चे तेल की रिफाइनरी बेच दी।
हर हंगामे आड़ में देश की कोई न कोई संपत्ती बेच रहे, जयश्रीरासम करती रही। जब राममन्दिर का शिलान्यास करवा दिया तो मूर्ख जनता सारे दुखों को भूल गयी और 2019 फिर से पाखंडी सरकार को अवसर प्रदान किया। 
2020 में फिर से एक हंगामा कोविट19 का प्रकोप जब कि भारत मे इतना अधिक नही था जितना कि प्रचार प्रसार कर के करोड़ों लोगों की हत्यायें कि गई, इस हंगामे में अडानी को पूरे देश के एफसीआई और नफेड जैसे सरकारी क़ब्ज़े वाले बाज़ार और कोऑपरेटिव बैंकों को दे दिया गया तथा हर राज्य एफसीआई जैसा एसीयुक्त गोदाम की लाखों एकड़ भूमि आवंटित की गई, क्या किसी ने सरकार उखाड़ लिया, जनता हिन्दू मुसलमान में उलझी रही, यह सब कुछ साजिशन होता रहा और विपक्ष उल जलूल में हंगामा खड़ा करता रहा तभी राहुल का नाम पप्पू रख दिया था।
जब जब भी कांग्रेस या सपा या ओवैसी की ओर से  रोजगार , महंगाई, काला धन शिक्षा और स्वास्थ्य, मुसलमानों पिछड़े आदिवासियों के आरक्षण के मुद्दे उठागये तब तक सरकार द्वारा षड्यंत्र रचा गया और देश मे वाह वाही लूटी गई कभी पुवाना तो कभी तीन तलाक़ तो कभी 370 , एनआरसी एनआरए जैसे क़ानून बना कर जनता को अपने पक्ष में कर लिया। इसलिये की 80 प्रतिशत भारत की जनता अन्धविश्वानिय और अंधभक्त मंदिर राम, आस्था पर विश्वास करती है और यह शातिर सत्तारूढ़ इनका भरपूर लाभ उठाते हैं। 
आज जो राहुल संसद भवन में बोल रहे हैं वह एक परिपक्व राजनेता की तरह बोल रहे हैं आज सदन में राहुल के आगे सभी सत्तारूढ़ की बोलती बंद है। 
आज किसी को समझ मे नही आ रहा है अब इसका काट कैसे करें।
परन्तु कांग्रेसियों में आज भी घमंड और स्वार्थ है, यदि आज भी नहीं समझेंगे तो इन घमण्डीयों का नामो निशान भी समाप्त हो जायेगा, तारिक़ अनवर एक मिसाल हैं, अपना अस्तित्व खोता देख कर समय रहते कांग्रेस में झुके तो आज उनका वजूद बचा वरना इनकी धोबी के कुत्ता जैसी स्थिति बन गई थी। कपिल सिब्बल ने कांग्रेस छोड़ कर अपने वजूद को नीलाम कर दिया आज वह एक अधिवक्ता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं हैं। रीता बहुगुणा न घर की न घाट की। 
छोटे एखबारों के पत्रकारों या यूटूबर को आज भी कांग्रेस के गेट से बाहर रखा जाता है। जबकि आज की तारीख में यही ज़मीनी पत्रकार हैं जो कांग्रेस की न्यूज़ लोगों के हाथों तक पहुंचाते हैं।
बहरहाल – एक हंगामे की आड़ में नित्य नये क़ानून बनाये जाते हैं और उसे रातों रात इम्लीमेंट करना – करवा दिया जाता है। यह बात हर राजनीतिक विपक्ष को पता है, बावजूद मुद्दे की बात नही करते। विपक्ष चाहें तो मोब्लिंचिंग रुकवा सकते हैं, लेकिन हिन्दू मुसलमान करवा कर हंगामा खड़ा करना तमाशा करना इनका भी मक़सद बन गया गया। जहां जहां भी मोब्लिंचिंग होती है ऐसा नहीं कि विपक्ष के लोग वहां नही रहते हैं उस जगह पर 10 लोग समाजवादी के लोग, और अन्य इंडिया गठन्धन के लोग लठ ले कर खेड़े हो जाएं फिर देखिये की देश कहीं भी मोब्लिंचिंग होती है क्या। पत्थर कोई फेंकता है और बुलडोजर मुसलमानों और दलितों पिछड़ों के मकानों पर चलाया जाता है। वहां विपक्ष खड़ा हो जाये, फिर देखिये रूढ़िवादी सरकार कितने को जेल या ईडी और सीबीआई लगवायेगी परेशान करेगी। लेकिन विपक्ष को मज़ा आता है। चोर चोर मैसेरे भाई। 
ZEA

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