आसाम पुलिस द्वारा तीन मणिपुर युवक के हत्या का आरोप

2. शवों का पोस्टमार्टम असम के बाहर तटस्थ डॉक्टर से कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली एसआईटी तीन हमार युवाओं की मौत की जांच कर रही है मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन। ज़ो युनाइटेड की निम्नलिखत मांग ।

ज़ोहनाथलाक का समाजिक समूह ज़ो यूनाइटेड, द्वारा आसाम में तीन फेक इनकाउंटर का पुलिस पर आरोप
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 नई दिल्ली – ज़ोहनाथलाक का समाजिक समूह ज़ो यूनाइटेड 16 जुलाई, 2024 को तीन हमार युवाओं की हत्या की निंदा करता है। 
 पिछले दिनों रायसीना मार्ग स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में मणिपुर के कुछ समाजिक संगठनों का समूह ज़ो यूनाइटेड  ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आसाम सरकार के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव प्रस्तूत किया।
इस अवसर पर डॉ. चिल्हमदुन विदे और ज़रज़ोकिम मार मणिपुर ने  प्रेस को सम्बोधित करते हुए आसम में पुलिस द्वारा बॉर्डर पर चेकिंग के दौरान मणिपुर के तीन युवाओ को आतांकि के शक में इनकाउंटर  मामले की न्यायिक जांच की मांग करते, मणिपुर के तीन युवक असम के कछार के कचुधरम पुलिस स्टेशन के अंतर्गत काबूगंज-अमजुर रोड जो मणिपुर के बॉर्डर के नज़दीक है जो ऑटो पर  जा रहे थे जिसे आसाम की गस्ती पुलिस ने रोक कर उन्हें बारी बारी से ऑटो बाहर निकाला और अलग अलग तलाशी लेने लगे और उसी दरमियान एक पुलिस वाला उनके ऑटो में रखे बैग में कुछ रख कर हट जाता है और और फिर दूसरा पुलिसवाला आकर उस बैग की तलाशी लेता है, और वह पुलिस वाला कहता है उसे पकड़ो उसे पकड़ो उसके बैग में आर्म्स है आतांकि है, आतांकि है, कह कर उन तीनों को पकड़ लिया और थाने में ले जाने की बजाए उन्हें पास के जंगल मे ले जा कर गोली मार दिया और इनकाउंटर दिखा दिया, जबकि वह बिकुल ही स्पष्ट रूप से फेक इनकाउंटर दिखाई दे रहा। यह सब कुछ एक फुटेज में साफ साफ दिखाई दे रहा रहा। मरने वालों की पहचान लल्लुंगावी हमार, लालबीक्कुंग हमार और जोशुआ लालरिंगसन के रूप में की गई है।
तीनों युवकों की मौत के तरीके ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है, हालांकि पुलिस अधीक्षक, असम के कछार जिले ने बताया कि 17 जुलाई, 2024 को गोलीबारी में तीन युवक मारे गए। जबकि वायरल वीडियो फुटेज में गिरफ्तारी के दौरान निहत्थे युवकों को सिविल ड्रेस  में युवक द्वारा गोली मारते हुए दिखाया गया है जिस से स्पष्ट हो जाता है कि यह इनकाउंटर नही बल्कि सोची समझी साजिश के तहत हत्या है। 
ज़ो यूनाइटेड द्वारा जब इस मामले को गौहाटी उच्च न्यायालय ले जाया गया तो न्यायाल ने बड़े ही विनम्र पूरी दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 14-18 का हवाला देते हुए असम पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि अनुच्छेद 14-18 के तहत समानता के लिए, जिससे रोकथाम के प्रावधान दर्शाता होते हैं जो (एससी और एसटी) अधिनियम, 1989 के तहत पुलिस द्वारा यह अत्यचार का मामला है। इसकी ज्यूडिशयरी के नियंत्रण में मेडिकल जांच होने तक इन लाशों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुरक्षित रखने का न्यायालय आदेश देती है। इसलिये हम मृतक परिवारों और ज़ोहनाथलाक समुदायों की ओर से गौहाटी उच्च न्यायालय के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता है।
असम पुलिस द्वारा वीभत्स कृत्य मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था । जो भारतीय संविधान अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ सम्मान के साथ जीने और मरने का अधिकार भी है। पीड़ितों को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से भी साफ़ तौर पर वंचित कर दिया गया। यह अधिनियम अधिकार का भी उल्लंघन करता है।
यूनाइटेड और दिल्ली में हमार महिलाओं द्वारा भारत सरकार के गृह मंत्री श्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपा गया वही दुसरीं ओर आसाम के यूनाइटेड समामाजिक संगठनों द्वारा आसाम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी ज्ञापन सौंपे गये। असम के हमार समुदाय द्वारा, बराक घाटी, कछार, ने इसका समर्थन किया। 
मानवाधिकार और अन्य सभी समाजिक एसोसिएशन, सामान्य मुख्यालय और कुकी महिला संगठन इस संबंध में कई नागरिक समाज संगठनों की ओर से प्रेस के लिये बयान जारी कर भारत सरकार, न्यायालय और राज्य सरकार सही निष्पक्ष जाँच कर कृत्य करने वाली आसाम की पुलिस को बरखस्त एवं मृतयक परिवार के साथ न्याय की है।
 ज़ो युनाइटेड की निम्नलिखत मांग है
1. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली एसआईटी तीन हमार युवाओं की मौत की जांच कर रही है 
मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन।
2. शवों का पोस्टमार्टम असम के बाहर तटस्थ डॉक्टर से कराया जाए।
3. असम पुलिस के शामिल अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए।
4. असम सरकार उनके परिवार को अनुग्रह राशि के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि प्रदान करेगी 
मृतक और पीड़ित परिवार को एक-एक सरकारी नौकरी भी दी जाए।
हमारी विनम्र प्रार्थना है कि गौहाटी उच्च न्यायालय सत्य, निष्पक्षता और न्याय का पालन करना जारी रखेगा 
जीवन की गरिमा और समानता सुनिश्चित करने के लिए भूमि के मौलिक अधिकारों को बनाए रखने का हर कदम।
ZEA

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