9 दिवसीय चिनार पुस्तक महोत्सव की यादगार कामयाबी
चिनार पुस्तक महोत्सव में किताबों के साथ—साथ यह उत्सव कला, संस्कृति और साहित्य का संगम बना।
मशहूर फिल्मकार, निदेशक और गायक विशाल भारद्वाज और रेखा भारद्वाज की आवाज ने भी कश्मीर की शाम को यादगार बनाया।
25 लाख से अधिक पाठकों से मिली पहले चिनार पुस्तक महोत्सव को कामयाबी

श्रीनगर – चिनार में 17 अगस्त से चल रहे श्रीनगर के पहले राष्ट्रीय पुस्तक मेले ‘चिनार पुस्तक महोत्सव’ में 1.25 लाख से अधिक पाठकों ने शिरकत की। 25 अगस्त को इस नौ दिवसीय पुस्तक मेले के आखिरी दिन 20 हजार से अधिक पाठक एसकेआईसीसी आए और अपने पसंद के विषय की किताबें देर शाम तक खरीदते दिखे। चिनार पुस्तक महोत्सव के आयोजक नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के निदेशक युवराज मलिक ने कश्मीर की आवाम का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, ”यहाँ स्कूल—कॉलेजों के विद्यार्थियों, परिवार के साथ बच्चों ने मेले का लाभ उठाया। सबसे अच्छी बात यहाँ देखने को यह मिली कि किताबों के साथ—साथ यह उत्सव कला, संस्कृति और साहित्य का संगम बना। हमें पाठकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और यह खुशी की बात है कि हर हाथ में किताब पहुँचाने का जो हमारा मिशन है, कश्मीर में हम उसमें कामयाब रहे।”
आखिरी दिन भी बच्चों के लिए यहाँ स्टोरी टेलिंग, ओपन माइक और मैथ्स क्विज में भाग लेन का अवसर था। स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों को ओडीशा लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और करियर विशेषज्ञ ब्रिगेडियर एल.सी. पटनायक (सेवानिवृत्त) ने सिविल सर्विसेज और अन्य सरकारी क्षेत्रों में भविष्य बनाने के लिए गाइड भी किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ आईएएस, आईएफएस, आईपीएस आदि सेवाओं के बारे में भी बताया। प्रदर्शन कलाओं में जम्मू—कश्मीर की समृद्ध विरासत पर भी इस दिन बात की गई। सुनंदा शर्मा, कृष्ण लंगू और पंडित अभय रूस्तम सोपोरी ने इस विषय पर चर्चा की।


चिनार पुस्तक महोत्सव की कामयाबी
नौ दिवसीय चिनार पुस्तक महोत्सव की कामयाबी 1.25 लाख से अधिक पाठकों, 100 से अधिक रचनात्मक, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लगाई जा सकती है। 17 अगस्त को कश्मीर घाटी के इस सबसे बड़े पुस्तक मेले का आगाज हुआ था। एसकेआईसीसी के आडिटोरियम में आयोजित उद्घाटन समारोह में श्रीनगर के उपायुक्त डॉ. बिलाल मोहिउददीन भट ने कश्मीर की आवाम से वादा किया था कि यह महोत्सव केवल किताबों के नजरिये से ही नहीं, घाटी की संस्कृति, भाषा, कला हर तरह से यहाँ की आवाम के लिए अहम होगा। उनके इस वादे को और कश्मीर में राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के ख्वाब को घाटी की आवाम ने एसकेआईसीसी पहुँचकर पूरा किया। यह उर्दू साहित्य के लिहाज से भी सबसे बड़ा पुस्तक मेला रहा, जहाँ 90 से अधिक उर्दू किताबों के स्टॉल पाठकों के लिए थे।
नौ दिवसीय पुस्तक महोत्सव में देशभर से आए लेखकों, साहित्यकारों से लेकर देश—सेवा में समर्पित आईएएस अधिकारी, विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, कॉलेज स्टूडेंट, प्रोफेसर, स्कूल प्रिंसिपल, स्कूली बच्चों, युवा, बॉलिवुड इंडस्ट्री से निदेशक, अभिनेता, सरकारी, गैर—सरकारी संस्थानों से आए निदेशकों, गायकों, विशेषज्ञों आदि ने शिरकत की।
चिनार पुस्तक महोत्सव के पहले दिन बच्चों के लिए ‘माय कंट्री, माय प्राइड’ पर ड्राइंग कॉम्पटीशन, कश्मीरी लोकगायक वाहिद जिलानी, डोगरी भाषा के प्रसिद्ध लेखक शिवदेव सिंह ने बच्चों को मातृभाषा के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कैलिग्राफर मलिक मुख्तार से बच्चों ने कैलिग्राफी आर्ट के गुन सीखे। बच्चों के लिए राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद की ओर से महफिल ए अफसाना सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें मशहूर उर्दू लेखक दीपक तंवल ने तीन बाल कहानियाँ सुनाईं। इस कार्यक्रम में डॉ. मुश्ताक मेहदी और डॉ. नजीर ने भी अपनी कहानियाँ सुनाईं। जाने—माने कश्मीरी बाल साहित्यकार अख्तर हुसैन भी इस दौरान मौजूद रहे। मशहूर करन सिंह से बच्चों ने स्कैच आर्ट की बारीकियों के बारे में जाना। बाल साहित्यकार ऊषा छाबड़ा ने बच्चों को अभिनय करते एक कछुए कहानी सुनाई, भोपाल से आई मनोवैज्ञानिक द्युतिमा शर्मा ने युवाओं को बताया कि किस तरह दूसरों की भावनाओं को महसूस किया जा सकता है और वे किस तरह सेल्फकेयर स्किल को अपना सकते हैं। कथावाचक वसुधा आहुजा और कुनाल शांडिल्य ने बच्चों को लेखिका सुधा मूर्ति की दो कहानियाँ सुनाईं और भोपाल की मनोवैज्ञानिक द्यूतिमा शर्मा ने भावनात्मक बौद्धिक क्षमता पर भी कार्यशाला की। स्टोरी टेलर शिवानी कनोडिया से अंग्रेजी की मजेदार कहानियाँ सुनीं, गणितज्ञ विवेक कुमार से वैदिक गणित की ट्रिक्स सीखे और उसके बाद मंडला आर्ट पर हुई वर्कशॉप में शामिल हुए।
‘चिनार टॉक्स’ जो साहित्यकारों, लेखकों से बातचीत करने के लिए एक मंच था, उसमें वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश नाथ झा ने उच्च शिक्षा में तकनीकी शब्दावली के महत्व पर अपने विचार रखे। ब्रांडिंग एंड सोशल मीडिया एक्सपर्ट शोभा कपूर और प्रसिद्ध लोकनृत्य कलाकार मधु नटराज ने डिजिटल या सोशल मीडिया के प्रभाव पर बात की। लेखकों की महफिल में कश्मीरी, उर्दू और हिंदी भाषा के जाने—माने लेखक और साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित डॉ. सतीश निगम ने भी साहित्यिक चर्चा की। यात्रा—वृत्तांत के जाने—माने लेखक डॉ. राजेश कुमार व्यास ने चिनार टॉक्स में अपने अनुभव साझा किए, वहीं ‘फिल्मों में कश्मीर’ विषय पर बात करते हुए फिल्म निदेशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी, दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर और लेखक अनंत विजय ने बातचीत की। इसी मंच से कश्मीर के समृद्ध हस्तशिल्प पर बात की गई और इस परंपरा को संरक्षित करने पर भी विचार किया गया। युवाओं को मशहूर कलाकार वीर मुंशी से मिलने और बात करने का मौका भी इस पुस्तक महोत्सव में मिला। वहीं बॉलिवुड अभिनेता अश्वथ भट्ट, मीर सरवर और हुसैन खान से युवाओं ने गुफ्तगू की।
इसी मंच से साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित डॉ. अशरफ जिया ने कश्मीर साहित्यिक विरासत को याद किया। कश्मीर के मशहूर लेखक मुश्ताक बशीर बर्क ने युवाओं को सूफी कवियों और आम कवियों में अंतर समझाया।
चिनार पुस्तक महोत्सव युवाओं के लिए एक बेहतरीन मंच इसलिए भी बना, क्योंकि यहाँ उन्हें साहित्य, कला और संस्कृति का संगम मिला। जहाँ युवा बॉलिवुड निदेशक, अभिनेता, गायकों के साथ सेल्फी खिंचवाते नजर आए। उनसे अपने मन की बात करते दिखे।
किताबों की दुनिया के बीच पाठक दोपहर बाद होने वाले म्यूजिकल कॉन्सर्ट में भी देर शाम तक जमे रहे। युवाओं के दिलों में राज करने वाले मशहूर युवा गायक सुनील कुमार गुर्जर उर्फ राहगीर कश्मीर की वादियों में अपने संगीत का रंग बिखरने आए। मशहूर फिल्मकार, निदेशक और गायक विशाल भारद्वाज और रेखा भारद्वाज की आवाज ने भी कश्मीर की शाम को यादगार बनाया।
चिनार टॉक्स में युवाओं ने कश्मीर के जाने—माने रेडियो जॉकी नासिर, फोटोग्राफर रूपाली तलान और पोडकास्टर अंजुम शर्मा से बात की। कश्मीरी साहित्य के लौह पुरुष प्रोफेसर शाद रमजान ने भी चिनार पुस्तक महोत्सव में आकर यहाँ की शोभा बढ़ाई। उन्होंने कश्मीरी शायरी के इतिहास और समय—समय पर उसमें होने वाले बदलावों पर बात की। युवा कश्मीर के सतही स्तर इतिहास को कैसे जान सकते हैं, इसके बारे में डॉ. एस.एन. पंडिता ने उनका मार्गदर्शन किया।
शाम के समय युवाओं ने डल झील के किनारे नुपूर पंत, पुणे के निकिता मोगे के पायलवृंदा ग्रुप ‘कलर्स आॅफ भारत’ का पंजाबी, गढ़वाली, मराठी, राजस्थानी, गुजराती, कश्मीरी नृत्य का परफोमेंस देखा। वहीं मशहूर गायिका दीपाली वट्टल और उनकी टीम ने कश्मीर लोकगीतों से युवाओं का दिल जीता। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवाओं को यहाँ राजस्थानी लोकगीत की महफिल सजी मिली, वहीं देश के कोने—कोने से कश्मीर की वादियों में अपने संगीत की धुन बिखेरने आए युग्म, शदज, कबीर कैफे जैसे म्यूजिकल बैंड के प्रदर्शन का लुत्फ भी युवाओं ने खूब उठाया। मशहूर राजस्थानी गीतकार कुतला खान की आवाज ने युवाओं का दिल जीता। वहीं पुस्तक महोत्सव में पाठकों ने भारत की विभिन्न भाषाओं में आयोजित मुशायरे का आनंद लिया।
फोटो प्रदर्शनी
चिनार पुस्तक महोत्सव में लगी फोटो प्रदर्शनियों ने बच्चों और युवाओं को खूब लुभाया। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) ने यहाँ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती फोटो प्रदर्शनी लगाई थी, जिसमें जम्मू और कश्मीर के इतिहास, विरासत, सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, कला, साहित्य, ज्ञान को बड़े ही अनोखे ढंग से दिखाया गया था। दूसरी फोटो प्रदर्शनी कारगिल विजय दिवस के 25 वर्ष पूरे होने पर थी, जिसमें बच्चों और युवाओं ने कारगिल के वीर योद्धाओं की कहानियाँ पढ़ीं। तीसरी फोटो प्रदर्शनी 23 अगस्त राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस को ध्यान में रखते हुए इसरो के सहयोग से लगाई गई थी, जिसमें भारत की अंतरिक्ष विकास यात्रा को दर्शाया गया था।
राष्ट्रीय ई—पुस्तकालय की पहल पर नि:शुल्क किताबों का अवसर
चिनार पुस्तक महोत्सव में बच्चों और युवाओं को राष्ट्रीय ई—पुस्तकालय के बारे में भी बताया गया। यह अपनी तरह पहला ऐसा मोबाइल ऐप्लिकेशन है जिसमें अलग—अलग आयु वर्ग के बच्चों और युवाओं को पढ़ने के लिए नि:शुल्क ई—पुस्तकें पढ़ने के लिए मिलती हैं।
पुस्तकें सभी के लिए
चिनार पुस्तक महोत्सव दिव्यांग पाठकों के लिए पढ़ने का अवसर लेकर आया। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की तरफ से यहाँ के एक स्टॉल पर ब्रेल पुस्तकें यूनिक आईडी दिखाने के बाद नि:शुल्क प्राप्त करने का भी अवसर था।
prnbtindia@gmail.com

