मुसलमान – आखिर अधिकतर अशिक्षित और गुलामीपसन्द क्यूँ हैं ?
मुसलमान डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, वैज्ञानिक इत्यादि बन सकता है बस दिल से इरादा करे अल्लाह पूरा करने वाला है।
हमें अपने बच्चों को बेहतरीन दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम देकर जिंदगी गुजारने के तरीके भी सिखाने चाहिए।
जिस कौम का आगाज ही इक़र से हुआ था, हैरत है कि वह क़ौम तालीम तरक्की में हैं पीछे,

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
एक मुसलमान के लिए दीनी और दुनियावी तालीम दोनों तलवार और ढाल की तरह है, जिंदगी की जंग में दोनों हथियार बहुत ज़रूरी है। दीनी तालीम वो ढाल है जो आपको दुनिया के मोहाज़ ए जंग मे हर किस्म की शैतानी हमलो से बचाती है। जबकि दुनियावी तालीम तलवार की तरह होती है जो दुनिया के बीच आपके रास्ते मे आने वाले चैलेज को खत्म करती है। लेकिन आज हमारा अलमिया ये है कि हमने ढाल को तलवार से जुदा कर दिया। यही वजह है कि आज उम्मत ए मुस्लिमा तादाद की क़सरत के बावजूद इन्तेशार और मसाईल का शिकार है! पैगंबर हजरत मोहम्मद ( सलव) ने दीन -ए-इस्लाम के साथ -साथ इल्म हासिल करने को भी जरूरी बताया। नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (सलव) ने फरमाया था- कि आपको शिक्षा यानि तालीम पाने के लिए चाहे चीन क्यों न जाने पढ़े। आज हम अपने बच्चों को अच्छा खिलाते हैं, अच्छा पहनाते हैं, लेकिन उन्हें अच्छी तालीम सिखाने में पीछे हैं। हमें अपने बच्चों को बेहतरीन दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम देकर जिंदगी गुजारने के तरीके भी सिखाने चाहिए। आज के दौर में लगभग हर समस्या का समाधान सिर्फ़ दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम है। लिहाज़ा खुद तय करना होगा की हर हाल में दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम को अपनी ज़िंदगी का पहला मक़सद बनाओगे। मुसलमान डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, वैज्ञानिक इत्यादि बन सकता है बस दिल से इरादा करे अल्लाह पूरा करने वाला है। बेहतर इल्म से ही इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ा जा सकता है। हालात को दुरुस्त करना दानिश्वरों की भी जिम्मेदारी है। पढ़ा-लिखा होने पर ही वह एक जिम्मेदार नागरिक बन सकेगा। आज इसलिए वैचारिक मतभेद हैं, क्योंकि लोग सही तरीके से इल्म से दूर हैं। धर्मनिरपेक्ष सरकार और तमाम संवैधानिक अधिकारों के होने के बावजूद मुसलमानों को समय-समय पर मुसलमान होने की कीमत चुकानी पड़ती है, जिसकी तरफ शायद ही किसी का ध्यान जाता है। अज़ीज़ो सितारे टूट गए तो क्या हुआ सूरज तो चमक रहा है। उससे किरणे मांग लो और उन अँधेरी राहों में बिछा दो जहां उजाले की सख्त जरूरत है।

