यूएनआई को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट का हवाला दे कर जबरन जगह खाली कराया
हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के अधिकारियों के सामने सुरक्षा बलों ने पत्रकारों, महिला पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों को बुरी तरह धकियाते, पीटते और दुर्व्यवहार करते हुए ऑफिस से निकाल दिया और परिसर को सील कर दिया।
देश की सबसे पुरानी और बड़ी न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यूएनआई) को 1 घंटे के अंदर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ और पुलिस बलों के जरिए जिस बर्बरता पूर्ण ढंग से खाली कराया गया,
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फासीवादी मंसूबों के खिलाफ अभियान।

एआईएन/*जन हस्तक्षेप*

देश की सबसे पुरानी और बड़ी न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यूएनआई) को 1 घंटे के अंदर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ और पुलिस बलों के जरिए जिस बर्बरता पूर्ण ढंग से खाली कराया गया, जन हस्तक्षेप उसकी कड़ी निंदा करता है। हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के अधिकारियों के सामने सुरक्षा बलों ने पत्रकारों, महिला पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों को बुरी तरह धकियाते, पीटते और दुर्व्यवहार करते हुए ऑफिस से निकाल दिया और परिसर को सील कर दिया। यह सरकार के मीडिया विरोधी रूख को दर्शाता है।

शुक्रवार 20 मार्च की शाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएनआई परिसर पर शहरी विकास मंत्रालय के विभाग को तत्काल प्रभाव से कब्जा देने का आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट ने इसके लिए दिन, सप्ताह या महीने तो दूर कुछ घंटे की भी मोहलत नहीं दी। इसके तुरंत बाद तीन ट्रक में सीआरपीएफ, दिल्ली पुलिस और अधिकारियों ने यूएनआई परिसर में जबरन घुसकर तत्काल आफिस खाली करने का आदेश दिया।


कर्मचारियों के अनुसार हाई कोर्ट का लिखित आदेश तब तक उसके वेबसाइट पर लोड भी नहीं हुआ था, उससे पहले ही अधिकारी और पुलिस बल वहां पहुंच गए और बर्बरता पूर्ण करवाई की। यह आपातकाल के बुरे दिनों जैसी याद दिलाता है। जन हस्तक्षेप यूएनआई में कार्यरत पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मियों के संघर्ष के साथ एकजुटता प्रदर्शित करता है।
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