संयुक्त किसान मोर्चा हुए लामबंद – सत्यग्रह आरम्भ – आंदोलन की तैयारी में जुटे
सोशलिस्ट पार्टी इंडिया की मध्य प्रदेश इकाई का समाजवादी पार्टी में विलय*
अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार ने सोयाबीन तेल के आयात शुल्क को 32% से घटाकर 12.5% कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार में मांग में कमी आई
*सोयाबीन की 8000 रूपये प्रति क्विंटल पर खरीद की मांग को लेकर मुलतापी में किसान सत्याग्रह*

*किसानों के उत्पादन का केवल 40% ही खरीदना सरकार का अपराध पूर्ण निर्णय*
*सोयाबीन का एक एक दाना खरीदे सरकार* *-डॉ सुनीलम*

*किसान सत्याग्रह कल भी जारी रहेगा*

MPNN NEWS
मध्यप्रदेश के मुलतापी में बस स्टैंड स्थित किसान स्तंभ पर किसान संघर्ष समिति द्वारा सोयाबीन 8000 रू, धान 5000 रू., मक्का 3000 रू., गेहूँ 4000 रू., चना 8000 रू. तथा गन्ने का 500 रू. प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित करने, अतिवृष्टि और जानवरों से नष्ट हुई फसलों का सर्वे कराकर राजस्व मुआवजा और फसल बीमा का भुगतान करने, बन्द मंडियों को शुरू करने आदि मांगों को लेकर किसान सत्याग्रह शुरू किया गया। किसान सत्याग्रह में पहुंचे विभिन्न ग्रामों के किसानों ने कहा कि 10 साल पहले के भाव पर सोयाबीन की खरीद हो रही है जबकि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी दोगुनी हो गई है। किसानों ने कहा कि अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल खराब हो गई है , फलियां बहुत ही कम लगी है जिससे लागत भी नही निकल पा रही है। क्षेत्र में अतिवृष्टि से सब्जी की फसल भी पूरी तरह खराब हो गई है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि प्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों ने जब से सोयाबीन के दाम बढ़ाने का आंदोलन शुरू किया है तब से सोयाबीन के भाव में 400-500 रूपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। सरकार को भी 40 साल बाद एम एस पी देने का खयाल आया है लेकिन किसानों के उत्पादन का केवल 40% ही खरीदना सरकार का अपराधपूर्ण फैसला है। सरकार को किसानों के द्वारा पैदा किए गए अनाज का एक एक दाना खरीदना चाहिए।
एड आराधना भार्गव ने कहा कि सरकारें पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। किसानों की आत्महत्याएं लगातार बढ़ रही है क्योंकि सरकार ने किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू नही किया गया।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं द्वारा किसानों पर अपमानजनक टिप्पणी की जाती है लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किसानों के खिलाफ टिप्पणी करने वाले नेताओं पर कोई कार्रवाई नही करना भाजपा का किसान विरोधी रवैया दर्शाता है।
जिलाध्यक्ष जगदीश दोड़के ने कहा कि कृषि कार्य करने वालों को अकुशल श्रमिक की श्रेणी में रखा है जिसकी एक माह की मजदूरी 9825 रूपये तय की गई है। इस तरह चार माह की मजदूरी ही 39,300 रूपये हो जाती है जबकि चार माह दिन-रात मेहनत करने पर बड़ी मुश्किल से 4-5 क्विंटल सोयाबीन उपज हो पाती है जिसकी एकड़ की आय वर्तमान दर पर एक 20,000 ही हो पाती है। उन्होंने कहा कि किसान सत्याग्रह कल भी जारी रहेगा
जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण बोरबन ने कहा कि मुलताई मंडी बंद कर सरकार ने किसानों को बिचौलियों के हवाले कर दिया है जो मंडी भाव से 300-400 रूपये कम दाम पर किसानों की उपज खरीदते हैं।
तहसील अध्यक्ष कृपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसानों को गेहूं का दाम 2200 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है जबकि वही गेंहू शहरों में पहुंचाकर व्यापारी 5000-6000 रूपये प्रति क्विंटल बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं।
किसान सत्याग्रह में रग्घू कोड़ले, शिवलू पटेल, बिनोदी महाजन, डखरू महाजन, सीताराम नरवरे, अनिल सोनी, दिलवर सिंह, मुकेश सिंह, दुरवन सिंह , शिवदयाल बनखेड़े, डॉ चंद्रशेखर नागले, भरत चौरे, बाबूलाल हारोड़े, लक्ष्मण परिहार मूलचंद सोनी, तीरथ सिंह, सुदामा सिंह, लखनसिंह, दीपक पवार, कैलाश सिंह,चैन सिंह, संतोष सिंह,मलखान सिंह,गोलू सिंह, जीवन सिंह, रघुवीर सिंह, मारोती खौसे, मोतीराम चौहान, हुकुमचंद हारोड़े, शत्रुघन यादव, भागवत परिहार सहित सैकड़ों किसान शामिल हुए।
*सोयाबीन तेल के लिए आयात शुल्क 32% से घटाकर 12.5% करने से सोयाबीन की कीमतों में भारी गिरावट*

*एसकेएम ने किसान विरोधी मोदी सरकार की निंदा की, 30 सितंबर को भोपाल में होने वाले सोयाबीन किसानों के किसान सत्याग्रह को समर्थन दिया*
*8000 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग की*
मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के तहत सोयाबीन तेल के लिए आयात शुल्क 32% से घटाकर 12.5% करने के कारण पूरे भारत में सोयाबीन किसानों को कीमतों में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में, किसान सोयाबीन को केंद्र सरकार की कृषि लागत एवं मूल्य समिति (सीएसीपी) द्वारा निर्धारित एमएसपी 4850 रुपये से काफी कम 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचने पर मजबूर है।
खरीफ सीजन 2024-25 के लिए सीएसीपी की रिपोर्ट के अनुसार, ए2+एफएल के अनुसार उत्पादन लागत 3261 रुपये प्रति क्विंटल है। मौजूदा बाजार मूल्य इस अनुमानित लागत के लगभग बराबर है जो सी2 लागत से काफी कम है।
दुनिया के सोयाबीन उत्पादन का 95% अर्जेंटीना, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे तीन देशों से आता है। भारत का योगदान केवल 2.5% से 3% है। अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार ने सोयाबीन तेल के आयात शुल्क को 32% से घटाकर 12.5% कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार में मांग में कमी आई है, जिससे कृषि व्यवसाय को भारी मुनाफा कमाने के लिए कम मूल्य पर फसल खरीदने में मदद मिली है। परिणामस्वरूप सोयाबीन की कीमत दस साल पहले 2013-14 में देखी गई दर पर लौट आई है।
खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन की बढ़ती लागत और फसलों की बिक्री से घटती आय किसानों को सोयाबीन की खेती से दूर कर रही है।
इस संदर्भ में, देश भर में सोयाबीन किसानों ने व्यापक विरोध मार्च निकाले हैं और फसल के सबसे बड़े उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में राज्य एसकेएम नेतृत्व ने 8000 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग को लेकर 30 सितंबर 2024 को भोपाल के नीलम पार्क में किसान सत्याग्रह करने का फैसला किया है। एसकेएम निर्धारित संघर्ष के प्रति एकजुटता और समर्थन व्यक्त करता है।
तीन शीर्ष सोयाबीन उत्पादक राज्य – मध्य प्रदेश जिसे सोया राज्य के रूप में जाना जाता है, उसके बाद महाराष्ट्र और राजस्थान – भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों द्वारा शासित हैं, जो कृषि व्यवसाईयो का पक्ष ले रही हैं और मोदी सरकार की कॉर्पोरेट पक्षीय नीति से लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं तथा इस प्रकार किसानों के साथ विश्वासघात कर रही हैं।
एसकेएम देशभर के किसानों से आह्वान करता है कि वे कॉरपोरेट पक्षीय और किसान विरोधी मोदी सरकार का पर्दाफाश करें और सोयाबीन किसानोंके वास्तविक संघर्ष का समर्थन करें।

भोपाल चलो ! भोपाल चलो!
*किसान सत्याग्रह*
दिनांक : 30 सितंबर 2024,
सुबह : 10 से शाम 4 बजे
स्थान : नीलम पार्क, भोपाल ( म.प्र.)
हमारी मांगे :
*) सभी फसलों की एमएसपी(सी 2+50%) पर खरीद की कानूनी गारंटी दो!
*) सोयाबीन 8000 रू, धान 5000 रू., मक्का 3000 रू., गेहूँ 4000 रू., चना 8000 रू. तथा गन्ने का 500 रू. प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित करो !
*) सभी किसानों का कर्जा माफ करो !
*) अतिवृष्टि और जानवरों से नष्ट हुई फसलों का सर्वे कराकर राजस्व मुआवजा और फसल बीमा का भुगतान करो !
*) प्रदेश की बन्द मंडियों को शुरू करो!
*) बिजली बिल माफ करो!
*) प्राकृतिक आपदा, सर्प दंश, बिजली का करंट तथा जंगली जानवर के हमले से मौत होने पर पीड़ित के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा दो!
*) वन अधिकार के पट्टाधारी किसानों को कब्जा दो!
*) चरनोई और तालाब आदि को अतिक्रमण मुक्त करो!
*) आवारा पशुओं तथा जंगली जानवरों द्वारा फसलों को हुए नुकसान पर लागत से डेढ़ गुना मुआवजा दो!
*) राशन में गेहूं-चावल के साथ दाल, शक्कर, केरोसिन का तेल दो!
*समाजवादी पार्टी को मिला प्रदेश के अन्य सोशलिस्टों का साथ*
*सोशलिस्ट पार्टी इंडिया की मध्य प्रदेश इकाई का समाजवादी पार्टी में विलय*

इंदौर : पिछले 8 वर्षों से सोशलिस्ट पार्टी इंडिया में काम कर रहे सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भोपाल में आयोजित समाजवादी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्षों के सम्मेलन में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामस्वरूप मंत्री के नेतृत्व में प्रदेश भर से पदाधिकारी भोपाल पहुंचे थे और उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव, मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व विधायक दल के नेता डॉ. सुनीलम और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री बादशाह सिंह की उपस्थिति में पार्टी का विलय करने की घोषणा की।
सभी पदाधिकारी और साथियों का डॉ मनोज यादव और बादशाह सिंह ने पुष्प माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर करीब 40 जिलों के जिला अध्यक्ष, पार्टी की पूरी प्रदेश कार्यकारिणी और प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद थे। रामस्वरूप मंत्री के अलावा दिनेश सिंह कुशवाहा, डीएस मिश्रा, ममता मेहरा, सुषमा यादव, भगवान सिंह यादव, बटेश्वर सिंह , कमलेश परमार, सहित इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, बड़वानी, आगर मालवा आदि जिलों के कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी में शामिल हुए ।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी देश की तीसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। जिसके लोकसभा में 37 तथा राज्य सभा में 4 सांसद है। समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश में 113 और महाराष्ट्र में 2 विधायक हैं । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को विधानसभा चुनाव में 37% वोट तथा लोकसभा चुनाव में 44% वोट मिले है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के साथियों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से पार्टी का वैचारिक आधार और
मालवा निवाड में संगठन मजबूत होगा।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी के सभी साथियों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से मालवा- निमाड़ अंचल में समाजवादी पार्टी को मजबूती मिलेगी और तीसरा विकल्प बनने का रास्ता
बनेगा। ये सभी साथी संघर्ष में भी जुड़ रहे हैं तथा इनके आज पार्टी में शामिल होने से मध्य प्रदेश में पार्टी का जनाधार और मज़बूत होगा।

