डा०बी०आर०अंबेडकर के सुपुत्र यशवंतराव अंबेडकर का जीवन परिचय को समझाने का प्रयास

डा अंबेडकर के कारण एससी-एससी पिछड़ी जातियों में जागरूकता के कारण स्वार्थी संगठन नेतृत्व को ऊपर उठने के अवसर ने समाज को जातियों में बांटने का सिलसिला शुरू हुआ।

संविधान निर्माण के योगदान के अलावा उनके परिवार के अन्य योगदानों से एससी-एससी पिछड़ी जातियों के लोगों का कोई सरोकार नहीं है, ऐसा लग रहा है।

डा०बी०आर०अंबेडकर के सुपुत्र यशवंतराव अंबेडकर का जीवन परिचय को समझाने का प्रयास, चिंतन!

रूम सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष) लेबर पार्टी ऑफ इंडिया

लेखक के यह अपने विचार हैं

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बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के बेटे यशवंतराव अंबेडकर के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं में इतनी बड़ी पैदल यात्रा भारत में आज तक किसी ने नहीं की है,लोग कहते हैं। जबकि लोग मा० ‌काशीराम की साईकिल मार्च का जिक्र करते हैं। उन्हें डॉ अम्बेडकर के परिवार के योगदान सिर्फ संविधान निर्माण के योगदान के अलावा उनके परिवार के अन्य योगदानों से एससी-एससी पिछड़ी जातियों के लोगों का कोई सरोकार नहीं है, ऐसा लग रहा है। मा० कांशीराम ने बसपा प्रमुख प्रमुख की हैसियत से पांच किलोमीटर पैदल मार्च एक राजनैतिक यात्रा थी। उससे समाज उत्थान जागरुकता समाजसेवा के रूप में नहीं देख सकते, बल्कि दल उत्थान राजनैतिक जागरूकता के रूप में हम देखते हैं। जबकि यशवंतराव अंबेडकर का पैदल मार्च समाजसेवी जो कांशीराम के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन समाज जागरुकता के में देखना चाहिए।शोषित वर्ग जातियों को समझने की जरूरत है।
मा० काशीराम जी का सौभाग्य था,कि फ्री में चमक गये। बहुजन शोषित समाज ने कभी अंबेडकर जी को समझा ही नहीं?यह एससी समाज पहले जगजीवन राम जी के साथ कांग्रेस में रहा। जब उनकी मृत्यु हो गई, तो काशीराम के साथ इसलिए खड़ा हो गया, कि उनके अलावा दूसरा कोई नेता नहीं था। इसलिए यह एससी समाज हमेशा नेताओं के पीछे रहा। है, पहले जगजीवन राम जी के पीछे था।
बाबू जगजीवन राम जी के परिनिर्माण के उपरांत देश में एससी-एसटी, पिछड़ी जाति की राजनीति के अंत होने के संदेश के कारण मा०काशीराम बसपा का जन्म हुआ, मायावती भी इसी कड़ी का हिस्सा होने की वजह से सफलता की सीढ़ियां प्राप्त करने में सफल हुईं, इसलिए शोषित वर्ग जातियों के लोग बसपा के साथ खड़े हो गए थे, बसपा सफल होती चली गई।
डा अंबेडकर के कारण एससी-एससी पिछड़ी जातियों में जागरूकता के कारण स्वार्थी संगठन नेतृत्व को ऊपर उठने के अवसर ने समाज को जातियों में बांटने का सिलसिला शुरू हुआ। जो आज भी निरंतर आगे बढ़ता ही जा रहा है। जिसे अब ब्रेक देने की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं हुआ, शोषित वर्ग जाति के लोग जातिगत नेतृत्व एवं हिंदू धर्म हिंदुत्व धार्मिकता के कारण स्वत अपने अधिकारों को खत्म होते देख सकेंगे। लेबर पार्टी आफ इंडिया एससी-एससी पिछड़ी जातियों के हाथ से सबकुछ छिनता हुआ देख रहीं हैं।
शोषित समाज को वर्गवादी नेतृत्व राजनेता की जरूरत है। वर्गवादी नेतृत्व ही सभी को साथ लेकर चल सकता है, और सभी के साथ न्याय भी कर सकता है। इसके लिए अंबेडकरवादी वर्गवादी नेतृत्व को खड़ा करने में समाज के बुद्धजीवियों को आगे आने की जरूरत में लेबर पार्टी आंफ इंडिया सभी की आशाओं पर खरा उतरने का प्रयास कर रही है।
स्थानीय नेतृत्व एवं तर्कसंगत चिंतन अर्थात अंबेडकरवाद के बिना कोई समाज अपने पैरों पर खड़ा नही हो सकता। यही हाल एससी-एससी पिछड़ी जातियों का है, जो जो अपनी कोम के नेताओं पर भरोसा करता है।बह समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता। इसलिए बहुजन शोषित वर्ग को अंबेडकर जैसी नेतृत्व क्षमताओं के लोगों के संगठन नेतृत्व को मजबूत करने के लिए उनकी नीति नियत रणनीति को समझना चाहिए। जबकि एससी-एसटी पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों के उत्थान में नीति नेतृत्व संगठन भूमिका के बिना उत्थान होना असम्भव है। इसलिए सही क्या गलत क्या को समझना बहुत जरूरी है। जागो युवा जागो,जागो बहुजन जागो!
रुमसिहं राष्ट्रीय अध्यक्ष लेबर पार्टी आफ इंडिया

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