देहरादून के लेखक ग्राम में नालंदा पुस्तकालय
विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर इसका नामकरण नालंदा के नाम पर किया गया है।
यह भारत की पहली और अपनी तरह की अनोखी पुस्तकालय होगी जहां प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक विधा की पुस्तकें छात्रों के लिए सुलभ होगी।
एक संवेदनशील लेखक का सपना हुआ साकार, लेखक ग्राम में बन कर तैयार हुआ नालंदा पुस्तकालय


डॉ दर्शनी प्रिय

पुस्तकें, समाज का आईना है। ये समाज और देश हित में ठीक वैसे ही भूमिका निभाती है जैसे ओलंपिक में रिले मशाल लेकर दौड़ने वाला कोई खिलाड़ी। यह हमारी बौद्धिक संपदा है। किसी भी देश की प्रगति, ज्ञान विज्ञान और विकास में पुस्तकों का महती योगदान रहा है। पुस्तकें न केवल हमारी भौतिक संपदा और सच्ची साथी है अपितु यह हमारे इतिहास का पारदर्शी दर्पण भी है। हमारे भीतर रचनात्मक मूल्यों की आधारशिला रखने वाली किताबें हमारी सबसे महंगी पूंजी है।
देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री ने देहरादून के थानो गांव स्थित लेखक ग्राम में एक ऐसे ही पुस्तकालय, जिसे नालंदा पुस्तकालय का नाम दिया गया है, का हाल ही में शिलान्यास किया। विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर इसका नामकरण नालंदा के नाम पर किया गया है। जहां 7 लाख से भी अधिक पुस्तकों को रखे जाने की योजना है। यह भारत की पहली और अपनी तरह की अनोखी पुस्तकालय होगी जहां प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक विधा की पुस्तकें छात्रों के लिए सुलभ होगी। इस महत्वपूर्ण दिवस पर इंडिया टीवी के प्रसिद्ध टीवी एंकर रजत शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।
श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी ने पुस्तकों के महत्व को बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि यही हमारे देश की असली पूंजी है। यह हमारे लिए ठीक उसी तरह है जैसे कोई सैनिक हथियार से लैस होता है। यह बौद्धिक अस्त्र-शस्त्र की तरह है जिसे कवच बनाकर रचनात्मक कौशल का विकास किया जा सकता है। पुस्तकें आने वाली पीढ़ी के लिए असली पूंजी है। जीवन के उचित मार्गदर्शन और विकास में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। महापुरुषों की जीवनी से प्रेरित होकर सच्चे अर्थ में जीवन जीने की कला हमें पुस्तक ही सीखाती है।
निशंक ने कहा की आने वाले समय में यह पुस्तकालय और भी विविधताओं से भरा होगा जहां दुनिया भर की किताबें उपलब्ध होंगी। छात्र, लेखक, कवि साहित्यकार सभी एक साथ बैठकर यहां चिंतन मनन और लेखन कर सकेंगे। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी का स्वप्न भी यही था कि देश में इस तरह के पुस्तकालय की आधारशिला रखी जाए जो अपने आप में अभूतपूर्व हो। श्री अटल जी के सपने को पूरा करने का सामर्थ्य और संबल हमें उनके जीवन से ही मिला। आज हम उसे पूरा कर पा रहे हैं। इस अवसर पर श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की मूर्ति का भी अनावरण किया गया साथ ही एक राष्ट्र ध्वज भी स्थापित किया गया। जो आने वाले समय में राष्ट्रपति गौरव और उन्नत मस्तक का प्रतीक होगा। हजारों छात्रों और गणमान्यों की उपस्थिति में नालंदा पुस्तकालय के शिलान्यास ने देश में एक इतिहास रचा। निश्चित ही यह पठन पाठन का एक मजबूत स्तंभ साबित होगी।

