स्वतंत्र सेनानी लतीफ शम्सी के निधन पर बिहार के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान उनके पैतृक गांव काको पहुंचे परिवार को संतावना देने
राज्यपाल ने कहा, “मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं शम्सी साहब से कभी नहीं मिल सका, लेकिन उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा लतीफ शम्सी साहब का जीवन समाज और साहित्य के प्रति समर्पित था। वे एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी और उर्दू साहित्य की धरोहर थे।
मुजाहीदे आज़ादी का एक टिमटिमाता चिराग आज गुल हुआ
स्वतंत्र सेनानी स्वर्गीय अल्मा शम्सी के निधन पर बिहार के राज्यपाल शोकसम्पत एवं परिवार को संतावना देने काको पहुंचे

सैयद आसिफ इमाम काकवी

बिहार के माननीय राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने काको में स्वर्गीय लतीफ शम्सी साहब के परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
उन्होंने कहा, “शम्सी साहब ने अपने साहित्यिक और सामाजिक कार्यों के माध्यम से राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”परिवार के सदस्यों यूसुफ शम्सी, कहकशां शम्सी, अफ्शां शम्सी, और रक्शान शम्सी ने राज्यपाल की यात्रा के लिए आभार व्यक्त किया। राज्यपाल ने शम्सी साहब की कब्र पर फातिहा पढ़कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की। इस अवसर पर एक विशेष दुआ सभा का आयोजन किया गया, जिसमें हाफिज मुहम्मद आरिफ ने कुरान की तिलावत की। सभा में स्थानीय गणमान्य व्यक्ति शकील काकवी, काशिफ काकवी, इक़बाल मज़हरी, सैफुल्लाह मलिक, गुलाम गौस, और राहुल रंजन सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। राज्यपाल ने कहा, “मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं शम्सी साहब से कभी नहीं मिल सका, लेकिन उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।” राज्यपाल की यात्रा ने काको क्षेत्र में शम्सी साहब की स्मृतियों को जीवंत कर दिया और उनकी विरासत के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न की। बिहार के जहानाबाद जिले के काको क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार, और समाजसेवी जनाब लतीफ शम्सी साहब के अद्वितीय सेवाओं को याद करते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा लतीफ शम्सी साहब का जीवन समाज और साहित्य के प्रति समर्पित था। वे एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी और उर्दू साहित्य की धरोहर थे। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं प्रार्थना करता हूं कि उन्हें जन्नत में अहम मुकाम मिले और उनके परिजनों को इस क्षति को सहन करने की शक्ति मिले। साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अपार योगदान देने वाले जनाब लतीफ शम्सी साहब के निधन पर बिहार और देशभर की कई प्रमुख हस्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उनकी मौत के बाद, न केवल भारत बल्कि विदेशों से भी शोक संदेश आने लगे। गुल्फ, पाकिस्तान, यूएसए, इंग्लैंड, कनाडा, फ्रांस जैसे देशों से भी लोग उनकी याद में संदेश भेज रहे हैं। उनकी विरासत को नमन करते हुए साहित्यकारों, राजनेताओं, और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सामाजिक कार्यकर्ता शकील काकवी ने शम्सी साहब के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, लतीफ शम्सी साहब ने काको और बिहार को साहित्य और संस्कृति के मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी सेवाएं अद्वितीय थीं, और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।” बिहार सरकार के मंत्री और शिक्षाविद्, डॉ. अशोक चौधरी जिन्होंने शम्सी साहब की साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा, वे सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक थे। सैयद आसिफ इमाम काकवी सामाजिक कार्यकर्ता और लतीफ शम्सी के करीबी सहयोगी, जिन्होंने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को याद करते हुए कहा, “शम्सी साहब ने हमें हमेशा सही राह दिखाने की कोशिश की।” सादिक अख्तर जेडीयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष और एहसान तबिश प्रसिद्ध कवि और लेखक, जिन्होंने उनकी कविताओं और विचारधारा को साहित्य जगत का अमूल्य खजाना बताया। उर्दू पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले, सैयद तबिश इमाम ने शम्सी साहब के साहित्य और समाजसेवा को प्रेरणादायक बताया। सैयद मोइन अख्तर (लेखक और समाजसेवी शम्सी साहब के साथ काम करने वाले सैयद मोइन अख्तर ने उनकी समाजसेवी भावना और लेखनी को भावपूर्ण शब्दों में याद किया। उर्दू साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में रिहान ग़नी ने शम्सी साहब को एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताया। एहसान तबिश ने शम्सी साहब को साहित्यिक धरोहर बताते हुए कहा कि उनकी कृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि हैं। शायर तारिक मोहिउद्दीन ने उनकी कविताओं और विचारों को साहित्य की अमूल्य संपत्ति बताया। बाबर इमाम ने शम्सी साहब के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी कविताएं और विचार अमर रहेंगे। रिजवान खालिद ने उनकी लेखनी को एक प्रेरणा बताया, जिसने काको की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। आफसर इमाम ने शम्सी साहब के समाजसेवी कार्यों को उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। कवि आफताब आलम ने शम्सी साहब की रचनाओं को पढ़ने और उनके विचारों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कासिम खुर्शीद कवि और लेखक उन्होंने शम्सी साहब को एक सच्चा साहित्यिक योद्धा और प्रेरक व्यक्तित्व बताया। पत्रकारिता क्षेत्र से श्रद्धांजलि देने वाले फैसल रहमानी ने उनके विचारों को आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिक बताया। गुलाम असदाक (पत्रकार) उन्होंने शम्सी साहब की लेखनी और विचारों को समाज में बदलाव का कारक बताया। सैयद पलवी साहब ने उनकी पत्रकारिता की दिशा में दिए योगदान को प्रेरणादायक कहा। जोआ मलिक ने उनके कार्यों को आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया। कशिफ काकवी (पत्रकार) उन्होंने शम्सी साहब के व्यक्तित्व को एक आदर्श बताया। प्रभुदयाल जी ने शम्सी साहब के न्याय और सत्य के प्रति समर्पण को सराहा। सैयद नासिर हुसैन कादरी (समाजसेवी) उन्होंने शम्सी साहब के सामाजिक कार्यों को उनके जीवन का सबसे बड़ा योगदान बताया। (समाजसेवी) अंजर हुसैन ने शम्सी साहब को सामाजिक न्याय और साहित्य का संरक्षक बताया। इन सभी श्रद्धांजलियों से यह स्पष्ट होता है कि लतीफ शम्सी साहब का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज, शिक्षा, और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में भी अभूतपूर्व भूमिका निभाई। उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है, और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगी। शम्सी साहब ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जेल की यातनाएं झेलीं लेकिन कभी सरकारी पेंशन स्वीकार नहीं की। उनका मानना था कि देश सेवा का कोई मूल्य नहीं होता। साहित्य में योगदान वे उर्दू अदब के एक चमकते सितारे थे। उनकी रचनाएं जैसे “काको की कहानी, अल्मा की जुबानी,” और “अलीगढ़ यूनिवर्सिटी और मेरी दास्तान-ए-हयात” साहित्यिक धरोहर हैं। शम्सी साहब ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने जीवन को सामाजिक न्याय, शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में समर्पित किया। जहानाबाद जिला प्रशासन के उर्दू प्रकोष्ठ ने उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया। उनका जीवन सेवा, संघर्ष और उत्कृष्टता का प्रतीक था। उनकी विरासत साहित्य, शिक्षा, और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। बिहार और भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जो उनके प्रति सम्मान को दर्शाता है। लतीफ शम्सी साहब के विचार और रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी। उनकी कृतियों को पढ़ना, उनके विचारों को समझना, और उनके योगदान को याद रखना समाज के लिए आवश्यक है। उनकी याद में आयोजित होने वाले साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी विरासत को जीवित रखा जाएगा। अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में जगह अता करे।

एक हस्ती था जो गुज़र गया।
एक छाव था जो खत्म हुआ।।
Yusuf Shamsi Syed Tabish Imam Syed Moin Akhtar Quasim Khursheed Syed Asif Imam Kakvi Ashok Choudhary Sadique Akhtar

