परम वीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद का नाम मिटाने में जुटी सरकार

शहीद अब्दुल हमीद के सरजमीं पर किसी स्कूल में उनका नाम लिखा था जिसे मिटा दिया गया है।

जिस प्रकार सरकार ने भारतीयों को इंसान से हिन्दू बना कर नफरत का विष समाज को पिला कर सांप के समान विषैला बना दिया है जिससे समाज मे अपने आपको लोग डसने पर मजबूर हो जाएगा, जो अभी से प्रारंभ हो गया है।

परम वीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद का नाम मिटाने में जुटी सरकार
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

भारत माता के सच्चे सपूत, परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद जी का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनकी वीरता ने देश की रक्षा की, और वे मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर हो गए। भारत जब अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, उसी दौरान 1933 में यूपी के गाजीपुर में एक लड़का पैदा हुआ, नाम था अब्दुल हमीद,,, ये बच्चा बड़ा होकर भारतीय सेना में भर्ती हो गया। अब्दुल हमीद के वीरता की गाथा शब्दों में नहीं पिरोई जा सकती। क्योंकि 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान वीर अब्दुल हमीद ने न सिर्फ पाकिस्तानी दुश्मनों के दांत खट्टे किए, बल्कि पाक के सात पैटर्न टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए। इसी दौरान वह दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए।। खबर है कि उनकी सरजमीं पर किसी स्कूल में उनका नाम लिखा था जिसे मिटा दिया गया है। जबकि अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार 

“विद्यालय पर वीर अब्दुल हमीद का नाम हटाने वाला प्रधानाध्यापक निलंबित, बीएसए ने की कार्रवाई” 

गाजीपुर जिले में विद्यालय पर परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद का नाम हटाने वाले प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। बीएसए की इस कार्रवाई के बाद प्रधानाध्यापक ने माफी मांगी है। यह खबर आज ही कि है, परन्तु क्या नाम बदलने से इतिहास बदल जाएगा लेकिन आज, योगी सरकार और मोदी सरकार ने उनके नाम पर बने विद्यालय का नाम बदलकर न केवल उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई है, बल्कि यह हमारे शहीदों की कुर्बानी का भी अपमान है। क्या किसी का मुस्लिम होना ही उसकी वीरता को मिटाने की वजह बन गया है? क्या हम अपने शहीदों को भी हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखने लगे हैं? वीर अब्दुल हमीद न तो किसी जाति के थे, न किसी धर्म के वे सिर्फ़ भारत मां के लाल थे।

 उनका नाम मिटाने की यह कोशिश हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना को आघात पहुंचाती है।  देशभक्ति किसी धर्म की मोहताज नहीं होती, लेकिन सरकारें इसे धर्म के तराजू में तौल रही हैं। आज सवाल सिर्फ़ अब्दुल हमीद जी का नहीं है, सवाल हमारे राष्ट्र की आत्मा का है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल किसी और वीर का नाम भी मिटा दिया जाएगा। अब्दुल हमीद जी का नाम सिर्फ़ एक स्कूल या सड़क पर नहीं, बल्कि हर हिंदुस्तानी के दिल में अमर रहेगा!
ZEA
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