वक़्फ़ संशोधन बिल में केंद्र सरकार की एंट्री, हिन्दुराष्ट्र के प्रावधान की पहल?
भारतीय मुस्लिम समाज के इस्लामिक प्रावधानों में सरकार का हसक्षताक्षेप यह एक सोंची समझी योजना के तहत इस्लामिक प्रावधानों में वयावधान डालना?
सरकार का मुस्लिम रीत रिवाजो में व्यवधान डालना धीरे धीरे मुसलमानो के इस्लामी सासंस्कृति को समाप्त करने और दबा कर हिन्दुराष्ट्र के तहत हाशिये पर रखने का बहुत बड़ी साजिश तो नही?
हम्माम में सब नंगे – घर मे आग लग गया घर के चिराग से

वक़्फ़ बोर्ड संशोधन बिल2025 केंद्र सरकार की साज़िश या आम मुस्लमामनो के हितों की रक्षा का प्रावधान?


आईना इंडिया की समीक्षा – एक कड़वा सच – स्मरण करते हुए, क्षमा चाहते लिख रहा हूँ, मैन जो अतीत को पढा है, और उसे जितना समझ सका हूं और जो अपने होश सम्भालने के बाद से 1961 से देखते आ रहा हूँ उसका संक्षेपत विवरण दे रहा हूँ – 100 वर्षों से हिन्दुराष्ट्र एक सपना संजोगे जन-संघ अपनी की कड़ी मेहनत और लगन से आज सत्ता हासिल तो कर ली परन्तु पहचान नही बना पाए रहे है, इसलिये की बाबा साहब भीम राव अंबेडकर का संविधान आड़े आ रहा है, जबकि उस संविधान को चूहे की तरह कुतर कुतर के मनुस्मृति का संविधान बनाने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन दलित पिछड़ी जाती ब्राह्मणों द्वारा बनाई गई वर्ण व्यवस्था में शिक्षा आड़े आ गया जिस के कारण शुद्र दो हिस्सों में बंट कर इनके द्वारा बनाई गया चौथा वर्ण शूद्रों का गुलामी प्रथा का प्रावधान क्षीण भिन्न हो गया जसके कारण हो नही पा रहा है, इसलिये, अपने चारों वर्णों का सही उपयोग नमुवादिओं मन्दिरमाफ़िया ब्राह्मणों सुचारू रूप से नहीं कर पा रहे है। तब एक गहन शोध के परिणामसरूप 1850 में अंग्रेजों ने फुट डालो राज करो कि नीति बनाई और वैसे ब्राह्मणों को चुना जो मुस्लिम हुकूमत से द्वेष और ईर्ष्या रखते थे उनको अपने पक्ष में कर मनुवादियों द्वारा बनाये गए वर्णों का उपयोग करते हुए सबसे पहले मुसलमानो को टारगेट किया और 1857 में लगभ 2200 मुस्लिम उलमाओं को दिल्ली से मेरठ तक जीटी रोड सड़क के किनारे लगे वृक्षों पर लटका कर फांसी दे दिया था, तब भी उस समय शिक्षित ब्राह्मणों और संजय सिंह जैसे क्षत्रियों ने खुल कर मुसलमानो का साथ दिया और अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था, वही स्थिति इन नमुवादिओं आज वर्तमान पैदा कर दी, आज फिर सवर्णों का बहुत बड़ा धड़ मुसलमानों के साथ खड़ा है, और आज फिर से जनसंघ भारतीय जनता पार्टी के रूप में देश की सत्ता पर क़ाबिज़ हो कर अपने हेडगेवार, गोलवलकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, और सावरकर के सपनो को साकार करने में लिये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अर्थात आरएसएस प्रवधानों के अनुसार सर्वपथम भारत के सरमायेदार मुसलमानो को आर्थिक नुकसान दे कर उन्हें कमज़ोर करना और भारतीय मुसलमानो की संस्थाओं को बर्बाद करने के कूटनीति के तहत वक़्फ़ बोर्ड के प्रावधानों में संशोधन कर उसमें अपने आपको सम्मलित करना यह हिन्दुराष्ट्र बनाने की पहल है? यह सिर्फ अपना इत्तिहास बनाना चाहते हैं और विश्व अपनी एक पहचान बनाना चाहते है, अपना इत्तिहास स्थापित करना चाहते है। स्वर्ण राजाओं का राज्य बनाना चाहते है, बाक़ी सब को गुलाम, प्राचीन इत्तिहास साक्षी है, इनके इस तुच्छ नीतियों से इनका और देश का क्या नुकसान होगा इससे इन्हें कोई मतलब नहीं है, परन्तु यह भूल गये हैं कि जब जब इन मनुवादियों ने चाहे जिस प्रकार का भी रूप धारण कर इस देश पर कब्ज़ा करना चाहा तब तब इन्हें मुंह की खानी पड़ी, इन्हें प्राजय का मुख देखना पड़ा, और इन्हें अपने जान माल का नुकसान उठाना पड़ा है।, और यह सीमित और संकीर्ण होते चले गये, बावजूद इसके यह हर 100 वर्षों के बाद अपने पूर्वजयों को याद करके आपको लड़ने के लिये तैयार करते है जो फिर से किया और रूप बदल कर सत्ता हासिल किया लेकिन अब दौर के हिसाब से इनका पाखंड फिर नई नस्लों को समझ मे आने लगा है अब फिर से देश में दंगा और समाज में जातिवाद का ज़हर फैला कर समाज बर्बाद करना शुरू कर दिया है, जबकि यह लोग फिर यह स्वयं बर्बाद होने जा रहे हैं, मनुवादी स्वर्ण के पतन का समय आ गया है। दुनियाँ जहां ने देखा और समझा कि अपने स्वार्थ की खातिर अंग्रेजों को भारत मे इन्होंने ठोर ठिकाना दे कर हिंदुस्तान में बसा कर ब्रिटिश हुकूमत स्थापित कर के हंसते खेलते हिंदुस्तान को इंडिया बनाने का काम था। जब इंडिया स्तीत्व में आया तो यही नमुवादी संघी अंग्रेजों से पहले मुगलिया सल्तनत के हुक्मरानों को अपने बेटियों की शादी करवा कर अपना सत्ता की मलाई भोगते रहे और मुगल हुकूमत का दम भरते उसके बाद अंग्रेजों की की चापलूसी और उनकी गुलामी करते जमींदारी प्रथा स्थापित कर खूब सारी ज़मीन मंदिरों और मठों के नाम पर अपना रूप बदल कर स्वयं और अंग्रेजों के अल्ला अधिकारियों को मौज कराते रहे। और दलितों पिछड़ों को मधुमक्खियों के छत्ता से शहद की तरह इस्तेमाल करने आदि हो गए अब यह एक ओर मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ते छेड़ते तीतईया और लाल वाले बिरना के छत्ते को छेड़ने को कोशिश करने लगे हैं।
सवर्णों का क्या होगा यह तो समय बताएगा, परन्तु यह वर्तमान की मनुवादी स्वार्थी सरकार ने जो काम किया है, एक तरह से कुछ सही काम किया है, मैं समझता हूं यह हिंदुस्तान की सरकार, अल्लाह की तरफ से है, मैं मानता हूं, इस सरकार की नीति बहोत ही गलत है, गरीब दलित, एससी/एसटी विरोधी है, बेशक इसका पतन हो जायेगा, लेकिन अल्लाह इस सरकार से कुछ बेहतर और अच्छे काम ले रहा है जिससे इंसानियत अर्थात इस्लाम जाग उठेगा, इंसानियत यह दुनिया तमान इंसानों में है। मैं इस सरकार के द्वारा बनाये गए कुछ क़ानून की सराहना करता हूं। जैसे तीन तलाक़, क्यूँ और कैसे? जो पवित्र कुरआन में इसका विस्तारपूर्वक विश्लेषण है, तलाक़ कब देना चाहिये, और कितने किस्तों में तथा कितने दिनों के अंतराल में तीन तलाक़ होना चाहिय, और किन की शर्तों के साथ और कितने गवाहों के समक्ष तलाक़ होना चाहिये तब तलाक़ मान्य होगा। लेकिन अफसोस है कि मुसलमान और आलिम मुफ़्ती होने के बावजूत किसी ने क़ुरआन के नियम को नहीं माना, न क़ुरआन के नियम अनुसार निकाह किया जा रहा और न तलाक़, – दूसरे, एक यह क़ानून क़ुरआन का था कि जिन असबाब, के पास आल औलाद, यानी कोई बाल बच्चे नहीं हैं और उनके क़ब्ज़े में उनका कमाया हुआ धन संपत्ति जो कुछ भी है, वह उन लोगों में वितरित कर दें जो बहुत ही गरीब, कमज़ोर,अपाहिज, बेसहारा, लोग हैं। लेकिन इस बात को जानते हुए भी क्या मुस्लिम उलमाओं अर्थात आचार्यो, मुफ़्ती अर्थात शंकराचार्यों ने कभी ऐसा किया? कभी नही… तो अल्लाह ने आज मोदी जैसे शातिर हुक्मरानों से इन भृष्ट उलमाओं की ऐसी कि तैसी करा दी। यही कड़वा सच है, कोई माने या माने, अंधभक्त मुसलमान तो नहीं मानेंगे पर विचारवान तो मानेंगे ही। मुझे कोई फर्क नही पड़ता। इसी लिये आलाह ने शातिरों द्वारा बनाई हई वक़्फ़ बोर्ड जैसे भृष्ट संस्थाओं को मोदी जैसे शातिर हुकुरानो के हवाले करवा दिया।
बेशक नये क़ानून की आड़ में सरकार का वक्फबोर्ड पर कब्ज़ा, मदरसा बोर्ड पर कब्ज़ा, मुस्लिम के अन्य संस्थानों पर क़ब्ज़ा शुरू हो गया, इसलिये की हिन्दुराष्ट्र बनाना है तो यहां इन मुस्लिम संस्थाओं का कोई काम नही है। अब आप चाहे धर्मनिरपेक्ष होने नाम पर जितना चिल्ला लो, आरएसएस अर्थात भाजपा सरकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
अब कथाकथित धर्मनिरपेक्ष बतायें अमित शाह पर मोदी पर चुनाव आयोग पर, और उन पुलिस वालों पर जो मुसलमानो पिछड़ी जातियों को बेवजह झूठे मुकदमा में फंसा कर जेल में डाल दिया है, उनके युवाजीवन को बर्बाद कर दिया,क्या इनके हितैषियों ने एक भी एफआईआर किया? हर सेकुलर पार्टी के हारने की वजह भी यही है। यह कथाकथित लोग भारतीय मुसलमानों के लिये भाजपा समर्थित आरएसएस से भी ज़्यादा खतरनाक है, दिल्ली दंगा पर खामोश रहे, एनआरसी सीएए पर खामोश रहे और, और वक़्फ़ बोर्ड पर चिल्ला रहे हैं, वक़्फ़ बोर्ड के साथ सरकार ने जो किया सही किया, वक़्फ़ बोर्ड के मालिक जो संस्थाएं और व्यक्ति बने बैठे थे वह सब उस भूमि का दुरूप्योग ही कर रहे थे, ओवैसी, हो या जमाते उलमा ए हिन्द, या जमाते इस्लामी हिन्द, यह सभी चोर हैं, हराम का खाने वाले हैं, गरीब मुसलमानो के अधिकार पर वर्षों से सफेद पोश बने ऐश कर रहे हैं, ओवैसी भी अपना बिजनेस उसी वक़्फ़ बोर्ड के सैंकड़ो एकड़ भूमि पर चला रहा है, और जमाते उल्माये हिन्द और जमाते इस्लामी हिन्द और बड़ी बड़ी पीर बाबाओं के मज़ारों पर कब्ज़ा किये राजा बने बैठे इस्ति चिश्ती, भिस्ट, गौसिया, अहले सुन्नत बल जमात, यह सारे के सारे भृष्ट हैं अब यह लोग इतना हंगामा कर रहे हैं देख लेना कुछ दिनों के बाद सब शांत हो जाएंगे, इनकी सरकार के साथ सेटिंग हो जायेगी, और अंदर ख़ाने सब चोर चोर मौसेरे भाई बन कर गले से गले मिलेंगे, और मिल बांट कर खायेंगे, या फिर यह सभी जेल में डाल दिये जायेंगे इनकी जीवन लीला समाप्त कर दी जाएगी। और दलित पिछड़ी आदिवासी गरीब हिंदुओं की तरह ही आम गरीब और मध्यवर्गीय मुसलमान अंधभक्त बना बेबस चरणों मे मुंह ताकता रहेगा। एक बात और बताता चलूं की आज जो वर्तमान सरकार के प्रधामंत्री मोदी के साथ मुसलमानो के कुछ दाढ़ी ऊंची टोपी वाले सफेदपोश दिखाई दे रहे हैं वह चापलूस और डरफोक बुज़दिल छुटभैये लोग हैं जो मज़ारो और मस्जिदों के नाम पर वक़्फ़ बोर्ड की प्रॉपर्टी दबाए अपना आशियाना बनाये बैठे हैं, उन्हें लगता है कि हम मोदी जी के श्रणों में रहेंगे तो हमारा आशियाना बच जायेगा, जबकि यह काल के आगोश में खुद ही जा कर बैठे अपने बर्बादी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यदि यह सेकुलर चाहते तो आज भी जेपी जैसा आन्दोल खड़ा कर सकते थे, सरकार को उखाड़ फेंक सकते थे, लेकिन यह सब आम गरीब मध्यवर्गीय मुसलमानो को अपने अपने खेमे में उनके हमदर्द बने उन्हें संसद में दोचार आदमी चीख़ चिल्ला कर सोशल मीडिया पर उनकी वीडियों वाइरल कर, तमाशा देखते रहते हैं, और मुस्लममनो कि प्रतिक्रिया लेते रहते हैं।

