1984 में कुसुमा का नाम सुर्खियों में तब आया, जब उसने 15 मल्लाहों को एक साथ गोली मार दी थी। कुसुमा का यूपी से लेकर एमपी तक के बीहड़ों में आतंक था। Read More...
इस आपदा में एक आंकड़े के मुताबिक 3886 लोग या तो मारे गए अथवा लापता हुए, इसमें से मात्र 644 शव मिले हैं। 3242 लोगों का कोई पता नहीं चल पाया। Read More...
क्षेत्रीय असमानताओं से बचने के लिए, हमें दोहरे प्रतिनिधित्व मॉडल, भारित मतदान या राज्यसभा की शक्तियों को बढ़ाने जैसी नवीन रणनीतियों पर विचार करना चाहिए। Read More...
रैगिंग को ख़त्म करने के लिए, एक बहुआयामी रणनीति, कठोर कानूनी प्रवर्तन, गुमनाम रिपोर्टिंग प्रणाली और त्वरित दंडात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है। मज़बूत सलाह नेटवर्क, आवश्यक संवेदीकरण कार्यक्रम और दयालु सहकर्मी बातचीत को प्रोत्साहित करना निरोध… Read More...
फ़िदा हुसैन सिर्फ आंदोलनकारी ही नहीं थे, बल्कि एक क्रांतिकारी पत्रकार भी थे। उन्होंने “चिंगारी” नामक पत्रिका निकाली, जिसमें अंग्रेज़ी हुकूमत के अत्याचारों को उजागर किया जाता था।--------------------------------------------- Read More...
ज्ञात हो कि उर्दू प्रशिक्षण को बंद करने का निर्णय न केवल शिक्षा संस्थानों पर हमला है, बल्कि यह हमारे सभ्यता सांस्कृतिक और सांझी विरासत को खत्म करने का एक मास्टर प्लान भी है। Read More...
यदि आप सोचते हैं कि हमें ऐसे घृणित 'मजाक' को नजरअंदाज कर देना चाहिए और केवल 'वास्तविक अपराधों' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तो आप यह समझने में विफल हैं कि समाज कैसे काम करता है। Read More...