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भारत-दक्षिण कोरिया रिलेशन्स आज के दौर में

दक्षिण कोरिया की सुरक्षा प्राथमिकताएँ कुछ अलग हैं। उसका प्रमुख ध्यान उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे और अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन पर केंद्रित रहता है। दूसरी ओर भारत की चिंताएँ चीन, हिंद महासागर, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ी हैं।…
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शिक्षा मांफीयाओं का सरकार के साथ सांठ-गांठ

यदि हम इस दिशा में समय रहते कदम नहीं उठाते, तो वह दिन दूर नहीं जब शिक्षा पूरी तरह एक व्यापार बन जाएगी, जहां किताबों के पन्नों में ज्ञान नहीं, बल्कि केवल लाभ-हानि का हिसाब लिखा होगा।
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निजीकरण का बोलबाला: सरकारी स्कूलों पर गहराता संकट – कंगाल होते रिश्ते

एक दशक में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 51 हजार खुले़, स्कूल जाने योग्य हर पांचवां बच्चा स्कूल से बाहर - शिक्षा का यह बढ़ता निजीकरण उसे एक सामाजिक सेवा से अधिक एक व्यापार में बदलता जा रहा है।
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शोर में डूबती सड़कें, बेकाबू बीट्स, बेहाल समाज।

कानून के स्तर पर देखें तो ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम मौजूद हैं। विभिन्न क्षेत्रों के लिए ध्वनि की सीमा तय की गई है, और रात के समय लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध भी है।
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प्रतिभा का सम्मान या संबंधों का विस्तार?

इस उजले पक्ष के समानांतर एक ऐसा पहलू भी उभरकर सामने आ रहा है, जिस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। धीरे-धीरे इन समारोहों का स्वरूप बदलता हुआ प्रतीत हो रहा है।
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स्वातंत्रता के लिए कराहती दिल्ली और उसका जश्न मनाते राजनीतिज्ञा …..

वही पार्टियां जो विपक्ष में रहते हुए राज्य का दर्जा देने का समर्थन करती हैं, पुरजोर मांग करती हैं, सरकार में आते ही राज्य का दर्जा देने की मांग को छोड़ देती हैं!
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साझा चूल्हा: संकट से समाधान की राह

यदि समाज सहयोग और साझेदारी की भावना को फिर से जीवित कर सके, तो केवल गैस सिलेंडर ही नहीं, बल्कि जीवन की कई अन्य चुनौतियाँ भी सहज रूप से हल हो सकती हैं।
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