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नेताओं को वेतन और भत्तों में कटौती करनी चाहिए।

संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक नैतिकता की पहचान होगी। इस संकट की घड़ी में सभी नेताओं और मंत्रियों को कार पर चलना त्यागना चाहिए।
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दुनियां की खबर लेने वाला – और समाज को ब खबर करने वाला अब ख़ुद ही बेखबर हो गया😭

ऐ लहद अपनी मिट्टी से कह दे - दाग़ लगने न पाए कफ़न में - क्यूंकि आज ही हमने बदले हैं कपड़े - और आज ही हम नहाये हुए है।
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चुनाव आयोग भाजपा के अधीन ? पश्चिम बंगाल में लगभग साढ़े तीन करोड़ मुसलमानों के फ़र्ज़ी मृतक, एवं शिफ्टिंग…

बंगाल में 90 प्रतिशत मुसलमानो का नाम मतदाता सूची से कटवा कर मतदान कराया गया - इसका मतलब भाजपा को सीधा सीधा बंगाल की सत्ता पर क़ब्ज़ा के संकेत,
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भारत-दक्षिण कोरिया रिलेशन्स आज के दौर में

दक्षिण कोरिया की सुरक्षा प्राथमिकताएँ कुछ अलग हैं। उसका प्रमुख ध्यान उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे और अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन पर केंद्रित रहता है। दूसरी ओर भारत की चिंताएँ चीन, हिंद महासागर, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ी हैं।…
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शिक्षा मांफीयाओं का सरकार के साथ सांठ-गांठ

यदि हम इस दिशा में समय रहते कदम नहीं उठाते, तो वह दिन दूर नहीं जब शिक्षा पूरी तरह एक व्यापार बन जाएगी, जहां किताबों के पन्नों में ज्ञान नहीं, बल्कि केवल लाभ-हानि का हिसाब लिखा होगा।
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निजीकरण का बोलबाला: सरकारी स्कूलों पर गहराता संकट – कंगाल होते रिश्ते

एक दशक में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 51 हजार खुले़, स्कूल जाने योग्य हर पांचवां बच्चा स्कूल से बाहर - शिक्षा का यह बढ़ता निजीकरण उसे एक सामाजिक सेवा से अधिक एक व्यापार में बदलता जा रहा है।
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शोर में डूबती सड़कें, बेकाबू बीट्स, बेहाल समाज।

कानून के स्तर पर देखें तो ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम मौजूद हैं। विभिन्न क्षेत्रों के लिए ध्वनि की सीमा तय की गई है, और रात के समय लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध भी है।
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प्रतिभा का सम्मान या संबंधों का विस्तार?

इस उजले पक्ष के समानांतर एक ऐसा पहलू भी उभरकर सामने आ रहा है, जिस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। धीरे-धीरे इन समारोहों का स्वरूप बदलता हुआ प्रतीत हो रहा है।
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