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RJS Positive Media se asocia con la Cruz Roja en el Día Internacional de la Mujer

रेड क्रॉस के पास साजो-सामान की आपूर्ति तो है, लेकिन आपदा के शुरुआती 24 घंटों के भीतर सहायता पहुंचाने के लिए उसके पास जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों की कमी है।
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यूपीएससी सफलता और बनाई हुई कहानियाँ

प्रशासनिक सेवा में सफलता का वास्तविक मूल्य इस बात से तय होना चाहिए कि कोई भी अधिकारी अपने पद का उपयोग समाज के हित में ईमानदारी, संवेदनशीलता हो।
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दौलत की फाइलें, भरोसे के सवाल

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह जिम्मेदारी और नैतिक आचरण का भी प्रतीक होता है विशेष रूप से पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी राज्य की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं - मीडिया की भूमिका भी इस…
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एहसास….

हर दस्तक एक नाम बन जाती है, हर खामोशी एक आलिंगन। कुछ घर नहीं ढहते उम्र के साथ, वे बस स्मृतियों में बस जाते हैं। -डॉ. सत्यवान सौरभ
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RWCW की ओर से ऑल इंडिया मुशायरा एवं सम्मानित समारोह

मुशायरा हिंदुस्तान की तहज़ीब तमद्दुन को जहां दर्शाता है वहीं समाज को एक दूसरे जोड़ कर आपसी भाईचारा को मजबूत बनाता है। मुशायरा उर्दू का वह चाशनी जिसे सुनने के बाद लोग महफ़िल नहीं छोड़ते बल्कि जुड़ कर अपनी ज़िंदगी उर्दू मुशायरा बनाने की कोशिश में…
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ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी

(सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदली है; भारत के सामने अब अवसरों के साथ नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हैं।)
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14वें ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्म के अध्यक्ष डा. संदीप मारवाह पाॅजिटिव मीडिया के संरक्षक बने।

आरजेएस फोरम में राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता मिशन का शुभारंभ: डा.संदीप मारवाह और प्रो.के जी सुरेश का मिलेगा मार्गदर्शन - आरजेएस पीबीएस की पाॅजिटिव मीडिया बुक 'ग्रंथ 06 का जीएफजे, नोएडा में लोकार्पण और सम्मान समारोह।
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एप्सटिन फ़ाइल्स : शर्म, सन्नाटा और हमारी सामूहिक विफलता

क़ानून और जाँच एजेंसियों की स्थिति भी कोई आश्वस्ति नहीं देती। धीमी जाँच, अधिकार-क्षेत्र की उलझनें, राजनीतिक दबाव और अंतहीन प्रक्रियाएँ—
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“प्रधानमंत्री मोदी के अनमोल रत्न” पुस्तक का हुआ भव्य लोकार्पण

ये पुरस्कार विजेता सिर्फ़ पदक पाने वाले नहीं हैं; वे भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक संपदा के जीते-जागते प्रतीक हैं। यह किताब उनकी प्रेरणादायक यात्राओं को हर घर तक पहुँचाने का एक प्रयास है।
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लालची नेता और बिकता पत्रकार,मिलकर कर रहे देश का बंटाधार*

आजाद भारत में नेता और पत्रकारों की जिम्मेदारी* आजादी के बाद नेता का धर्म था—संविधान, समानता और देश की एकता। पत्रकार का कर्तव्य था—डर के बिना सवाल, दबाव के बिना सच और सत्ता के सामने सीधी आंख।
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