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उर्दू ज़बान की बक़ा, फ़िराक़ गोरखपुरी के ख़्वाबों की तक़मील है:

उर्दू सिर्फ़ ज़बान नहीं बल्कि भारतीय तहज़ीब की रूह है। उर्दू जिसने हिन्दू–मुस्लिम दोनों के दिल जोड़े, उसी को सियासत की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
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भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो.संजय द्विवेदी*

1947 में बंटवारे के बाद भी हम रक्तपात रोक नहीं पाए। इसलिए भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं दुहराई न जाएं।
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baye-baye-registred-post-office – अलविदा रजिस्टर्ड डाक — एक युग की ख़ामोश विदाई

रजिस्टर्ड डाक कोई साधारण सेवा नहीं थी। यह उन दिनों की गवाही थी जब हम कागज़ पर स्याही से अपने जज़्बातों को उकेरा करते थे।
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Urdu – All India Kshtriye Society Seminar -آل انڈیا راجپوت سوسائٹی کا سیمینار

ڈاکٹر رحمت اللہ نے کہا کہ شری سنگھ ایک ایسے قائد ہیں جو ذات اور مذہب سے بالا تر سوچ رکھتے ہیں، اور بھارتیہ جنتا پارٹی کو چاہیے کہ وہ انہیں زیادہ بڑے کردار میں سامنے لائے تاکہ سماج کو بہتر قیادت فراہم کی جا سکے۔
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“तकनीक के युग में मानसिक गुलामी”

जिन्हें खुद का मानसिक स्वास्थ्य संभालना नहीं आता, वे ‘मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट’ बन बैठे हैं। स्क्रॉल संस्कृति ने हमारी सोच को टुकड़ों में बाँट दिया है।
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निजी बैंकों का नया लोकतंत्र”

किसी भी संस्था को आपकी अनुमति के बिना आपका व्यक्तिगत डेटा उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। इस पर एक कठोर दंड और स्पष्ट नियंत्रण क़ानून बनना चाहिये।
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