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hunger-and-malnutrition भारत के सामने एक जटिल चुनौती

निर्धनता: देश की एक बड़ी आबादी अत्यंत गरीबी में जीवनयापन करती है, जिसके पास गुणवत्तापूर्ण भोजन पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं होती।
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साहित्यान्चल सम्मान हेतु डॉ. प्रियंका सौरभ और डॉ. सत्यवान सौरभ का चयन*

यह दंपत्ति न केवल सक्रिय साहित्यकार हैं, बल्कि प्रतिदिन देश-विदेश के हज़ारों अख़बारों में विभिन्न भाषाओं में संपादकीय लेख लिखते हैं। डॉ. सत्यवान सौरभ की अब तक 17 पुस्तकें और डॉ. प्रियंका सौरभ की 10 पुस्तकें विभिन्न विधाओं में प्रकाशित हो…
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स्वतंत्रता सेनानियों के स्वप्निल हिंद का निर्माण करेंगे परिजन -कुमार पटेल !

भारत सरकार एवं विभिन्न प्रदेशों की राज्य सरकारें से महापरिषद् के माध्यम से अनुरोध करना है कि अखिल भारतीय स्ववंत्रता सेनानीय एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद् को संवैधानिक दर्जा दिया जाय।
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उर्दू ज़बान की बक़ा, फ़िराक़ गोरखपुरी के ख़्वाबों की तक़मील है:

उर्दू सिर्फ़ ज़बान नहीं बल्कि भारतीय तहज़ीब की रूह है। उर्दू जिसने हिन्दू–मुस्लिम दोनों के दिल जोड़े, उसी को सियासत की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
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भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो.संजय द्विवेदी*

1947 में बंटवारे के बाद भी हम रक्तपात रोक नहीं पाए। इसलिए भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं दुहराई न जाएं।
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baye-baye-registred-post-office – अलविदा रजिस्टर्ड डाक — एक युग की ख़ामोश विदाई

रजिस्टर्ड डाक कोई साधारण सेवा नहीं थी। यह उन दिनों की गवाही थी जब हम कागज़ पर स्याही से अपने जज़्बातों को उकेरा करते थे।
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