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कौन जानता है की मौत कहां खड़ी है और दलदल कहां है – रोज़गार की तलाश में तो निकलना ही पड़ता है।

भारत को अगर सच्चे मायनों में “विश्वगुरु” बनना है, तो पहले उसे अपने युवाओं को गुरबत, ग़ुलामी और गोली से आज़ादी दिलानी होगी।
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अलग ब्रज प्रदेश की मांग ?* 

वर्तमान स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश ,राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के ब्रज भाषाई क्षेत्रों को मिला कर भाषाई एवं सांस्कृतिक एकरूपता के आधार पर ब्रज प्रदेश के गठन की मांग की जा रही है।
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कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा: हर बार अमिताभ क्यों?

कॉलर ट्यून अब जनता का मानसिक उत्पीड़न बन चुकी है। दिमाग की नसों में जो कंपकंपी फैलती है, उसे विज्ञान वाले ‘वाइब्रेशन’ कहें, पर आम जनता इसे 'तंग आना' कहती है।
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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

ये शिक्षक किसी ब्रांड के बोर्ड तले नहीं पढ़ाते, इनकी कक्षाएँ बिना एयरकंडीशनर की होती हैं, और कभी-कभी बिना पंखे के भी। लेकिन इनके पसीने से ही भविष्य की नींव तैयार होती है।
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*”भविष्य बताने वाले, वर्तमान से बेख़बर क्यों”*

इतने बड़े-बड़े भविष्य वक्ता, ऊपर वाले से सीधा संपर्क... फिर भी किसी बड़े हादसे की ख़बर तक नहीं मिलती! - अब समय है कि हम इस ‘पाखंडी भविष्यवाणी तंत्र’ की पड़ताल करें।
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अग्निपथ योजना मात्र एक छलावा – अब लोगों को समझ मे आने लगा।

अंधेरे में लुप्त जीवन का नाम अग्निपथ - जो न कभी सच था और ना यह जीवन मे कभी खुशियां ही देने वाला ही था। यह स्कीम भारतीय युवाओं के जीवन के बहुमूल्य समय को नष्ट करने वाला स्कीम है।
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नव-उपनिवेशवाद के क्रूर मकड़जाल में छटपटाता अफ़्रीका

इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्ज़ा — बंदरगाह, एयरपोर्ट, रेलवे — सिर्फ खदान से पोर्ट तक। गाँवों तक सड़क नहीं, स्कूलों में बिजली नहीं। सुरक्षा दो — प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियाँ, हथियार दो, विरोध को आतंकी घोषित करो।
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मौलाना सैयद अबू अख़्तर क़ासमी का इंतेक़ाल, मिल्ली खेसारा*

उन्होंने इस्लाह-ए-मआशरा की एक तहरीक चलाई जिसने कई ख़ानदानों, नौजवानों और अवाम की ज़िंदगी में सकारात्‍मक तब्दीलियाँ लाईं।
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