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हिंदी पत्रकारिता के 200 साल

कल तक हिंदी टेक्स्ट को पढ़ने में कठिनाइयां महसूस कर रहे लोग दुनिया भर में हिंदी कंटेंट को सुन और देख रहे हैं। हिंदी पत्रकारिता देश की सबसे खास आवाज बन चुकी है।
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आईएएस-आईपीएस अधिकारी और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर सक्रियता के इस नए युग में, सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत छवि के बीच एक संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि वे न केवल लोकप्रिय हों, बल्कि प्रभावी और जिम्मेदार प्रशासक भी बने रहें।
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69वर्षीय महिला सुदेश सांगवान विश्व के लिये प्रेणास्त्रोत

अंतरराष्ट्रीय केटलबैल मैराथन चैंपियनशिप में मॉ-बेटे ने गोल्ड, सिल्वर व ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर रचा इतिहास - यह खेल अपने आपमे सब से अलग है।
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कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री का बयान: यह सिर्फ़ अपमान नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर चोट है

मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह का बयान सिर्फ़ शर्मनाक नहीं है, बल्कि वह ज़हर है जिसने भारतीय राजनीत को विषैला बना दिया – जहाँ मुसलमान को देशद्रोही, और मुसलमान फ़ौजी को शक की निगाह से देखा जाता है। यह वही मानसिकता है जो “टुकड़े-टुकड़े…
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“सीमा पर तनाव है, देशवासियों में डर है… और गोदी मीडिया फेक न्यूज़ में मशगूल है!”

सीमा पर तनाव, महंगाई, बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था पर न कोई बहस होती है, न सवाल। गोदी मीडिया की स्क्रीन पर बस चल रहा है:
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सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?”

कलम अब ज़िम्मेदार हो - साहित्य, पत्रकारिता, मीडिया और सोशल स्पेस — ये सब लोकतंत्र की रीढ़ हैं। लेकिन जब यही प्लेटफॉर्म विदेशी एजेंडों या राजनीतिक नफ़रत से ग्रस्त हो जाएं, तो उन्हें शुद्ध करना ही राष्ट्र की सुरक्षा का हिस्सा बन जाता है। अब…
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