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सिलमपुर में आपसी रंजिश के कारण हत्या – सम्परादायिक माहौल बनाने की कोशिश ?

उन्होंने और घर के सदस्यों ने पूरे मामले को इस तरह बताया- साहिल नाम के एक युवक की शंभू से पुरानी रंजिश थी। शंभू के भाई लाला ने भी साहिल को मारा था।
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एनसीपीयूएल में उठा कॉपीराइट का मुद्दा

एक पुस्तक पाठक, लेखक और प्रकाशक द्वारा बनाई गई है। कॉपीराइट मुद्दों को भी पुस्तक संस्कृति के प्रचार के साथ हल किया जाना चाहिए: डॉ. शम्स इकबाल
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पहलगाँम आतांकि हमला एक सोंची समझी साजिश तो नही?

इस हमले की जितनी भी आलोचना, जितनी भी भर्त्सना, जितनी भी निंदा की जाये कम कम ही होगी, लेकिन केंद्र सरकार को अपनी नीति सुनिश्चित करनी चाहिये, कहीं आतांकि के नाम पर किसी विशेष समुदायें के निदोष लोगों निशाना न बनाया जाने लगे। सिक्के के दो…
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“जोखिम ज़्यादा है, सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने की चाहत,

हमारा संविधान देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर किताब है। इसमें तीन मुख्य स्तंभ बताए गए हैं – विधायिका (संसद/विधानसभा), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें)। ये तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।
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बिहार हज यात्रियों के साथ बिहार सरकार का सौतेला रवैया – पूरे देश मे सब से महंगा…

गया से हज यात्रा सबसे महंगी क्यूँ ?— ₹4,01,885 प्रति यात्री- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जवाब दें, आखिर गया एयरपोर्ट के हज यात्रियों को इतना महंगा यात्रा शुल्क क्यूँ?
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ज़श्न-ए-उर्दू 2025: अदब, तहज़ीब और मोहब्बत का कारवां

उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी।
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मृत्यु का मर्म और मोक्ष का मेला”

कभी कहते — "भीड़ में मरे तो मोक्ष मिलेगा", अब कहते — "भीड़ से डर है, व्यवस्था कड़ी रखो भैया।" क्या यही है त्याग? यही सन्यास? या है धर्म अब एक सुरक्षित विकास?
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पाखंडी बाबा – मुख पर राम राम बगल में छुरी

बाबा यदि वाकई आत्मा की अमरता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें सबसे पहले वाई श्रेणी सुरक्षा का त्याग करना चाहिए — क्योंकि असली संत वही है, जो सत्य के साथ निर्भय खड़ा हो।
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प्राकृति से छेड़-छाड़ के कारण वर्षा के बदल जाते हैं पैटर्न प्राकृति आपदाओं की भी बढ़ जाती है आवृति

क्योंकि, पेड़ की कटाई से कई तरह के नुकसान हो रहे हैं। साइंस का मानना है कि पेड़ न रहने के कारण पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु और मानव जीवन पर कई प्रकार के प्रभाव होते हैं।
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पत्रकारिता के माध्यम से बाबा साहेब ने की वैचारिक क्रांति: प्रो.संजय द्विवेदी

भारतीय विदेश नीति एवं सुरक्षा, श्रम सुधारों, सिंचाई व जल प्रबंधन एवं भाषा नीति आदि सभी विषयों पर उनके विचार एवं कार्य आज भी प्रासंगिक है।
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