बिहार हज यात्रियों के साथ बिहार सरकार का सौतेला रवैया – पूरे देश मे सब से महंगा “गया” एयरपोर्ट क्यूं? नीतीश कुमार जवाब दें !!
“बिहार से इस साल 2378 हाजी हज के लिए होंगे रवान, मगर गया एयरपोर्ट से सिर्फ़ 272 यात्री ही क्यूँ?
गया से हज यात्रा सबसे महंगी क्यूँ ?— ₹4,01,885 प्रति यात्री- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जवाब दें, आखिर गया एयरपोर्ट के हज यात्रियों को इतना महंगा यात्रा शुल्क क्यूँ?
“बिहार से इस साल 2378 हाजी हज के लिए होंगे रवाना — मगर गया एयरपोर्ट से सिर्फ़ 272!

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
क्या कभी सोचा आपने कि जिस राज्य की आबादी करोड़ों में है, वहाँ से सिर्फ़ 2378 लोग ही हज के लिए जा रहे हैं? और इनमें से महज़ 272 ही गया एयरपोर्ट से उड़ान भरेंगे — जबकि गया एयरपोर्ट हज टर्मिनल के नाम पर सिर्फ़ घोषणाएँ होती रही हैं। परन्तु बिहार के हाजियों का दुर्भाग्य कहें कि बिहार के हाजी गया एयरपोर्ट की बजाए बाक़ी हाजी देश के अलग-अलग एयरपोर्ट से सफ़र करेंगे। फिर सवाल उठता है, ऐसा क्यूं? इसलिये की गया से हज यात्रा सबसे महंगी है — सुन कर आपका भी दिमाग हिल जाएगा ₹4,01,885 प्रति यात्री- बिहार के मुसलमानों से एक सवाल — मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जवाब दें, आखिर क्यूँ गया एयरपोर्ट से हज यात्रा की लागत पूरे देश में सबसे ज़्यादा है?


4,01,885 रुपये! – जी हाँ, यही रकम चुकानी होगी गया एयरपोर्ट से हज जाने वाले हर यात्री को। जबकि देश के अन्य राज्यों से यह खर्च कम है। सवाल यह है कि जो बिहार पहले “हज यात्रा में सहूलियत” की बात करता था, आज वही राज्य अपने हाजियों के लिए सबसे महंगी यात्रा क्यों तय कर रहा है?
2025 में बिहार से सिर्फ़ 272 लोग गया एयरपोर्ट से हज पर रवाना हो रहे हैं — यह संख्या न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि हुकूमत की नाकामी की तहरीर भी है। – राज्य सरकार ने कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई है कि कैसे हज यात्रियों को राहत दी जाए। हर साल सिर्फ़ “सम्मेलन”, “शुभकामनाएँ” और “फोटोशूट” ही नज़र आते हैं, लेकिन कोई ठोस ब्लूप्रिंट नहीं कि हज खर्च कैसे कम हो, सुविधाएँ कैसे बेहतर हों और गया को एक पूर्ण हज टर्मिनल कैसे बनाया जाए। क्या यही है ‘मुस्लिम हितों’ की राजनीति?
जो JDU नेता हर बार दावा करते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए बहुत कुछ किया — ज़रा बताइए, किया क्या है?
• हज सब्सिडी हटाने पर कोई विरोध नहीं,
• तीन तलाक़ बिल पर समर्थन,
• NRC जैसे बिलों पर चुप्पी,
• धारा 356 पर सहयोग,
• और अब वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर भी साज़िशन खामोशी।
नीतीश सरकार ने बार-बार बीजेपी के हर विवादित बिल को पास कराने में पूरा साथ दिया, चाहे उससे मुसलमानों को कितना भी नुकसान क्यों न हो।
गया एयरपोर्ट से हज यात्रा की लागत देश में सबसे ज़्यादा क्यों है — इसका जवाब अब सिर्फ़ तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है। और जब तक हम सवाल नहीं उठाएंगे, तब तक ये ‘देखावटी राहत’ और ‘झूठे दावे’ ही हमारे हिस्से आएंगे।
बिहार सरकार से सवाल बनता है? मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने वालों ने अब तक क्या किया? अब वक़्त है कि हम आवाज़ उठाएँ — हमें दिखावटी नहीं, ज़मीन पर अमल चाहिए। हज की लागत कम हो, सुविधा बढ़े और हर मुसलमान को बराबरी से हक़ मिले।

