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Sahitya

बशीर बद्र को आख़िरी सलाम -उर्दू अदब का एक रोशन चिराग बुझ गया।

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,** जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।" ** जी बहुत चाहता है सच बोलें,** **क्या करें हौसला नहीं होता।"
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आरजेएस परिवार ने 1923 के झंडा सत्याग्रह को किया याद कर देशभक्ति के गाए गीत.

स्वतंत्रता दिवस पर डा.संदीप मारवाह आरजेएस के नये कार्यक्रम "सकारात्मक लोगों के सफलता की कहानियां" का करेंगे लोकार्पण।
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अनहद अहद’ में डॉ. मालती बसंत और डॉ. आबिद अम्बर का सम्मान*

'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।'
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प्रियंका सौरभ की हृदयविदारक कविता “”अधूरी उड़ान”

फटे बैग, जलती तस्वीरें, अधूरी चिट्ठियाँ, ज़मीन पर बिखरीं रह गईं सब इच्छाएँ मिट्ठियाँ। वो माँ जो कह रही थी "जाना, फोन करना", अब बस उसके आँसुओं में है "तेरा लौट आना"।
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रहमान फाउंडेशन का विशेष आयोजन सैयद आसिफ इमाम काकवी और शकील अशरफी को सम्मान

आज के उपभोक्तावादी दौर में इस प्रकार की साहित्यिक-सांस्कृतिक बैठकों का अभाव हो गया है, और रहमान फाउंडेशन जैसी संस्था इस कमी को भरने का सराहनीय प्रयास कर रही है।”
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एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

आखिर में, सिंदूर की सौगंध एक प्रतीक है - वह प्रतीक जो हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक वादा है
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