दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,** जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।" ** जी बहुत चाहता है सच बोलें,** **क्या करें हौसला नहीं होता।" Read More...
'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।' Read More...
फटे बैग, जलती तस्वीरें, अधूरी चिट्ठियाँ,
ज़मीन पर बिखरीं रह गईं सब इच्छाएँ मिट्ठियाँ।
वो माँ जो कह रही थी "जाना, फोन करना",
अब बस उसके आँसुओं में है "तेरा लौट आना"। Read More...
आज के उपभोक्तावादी दौर में इस प्रकार की साहित्यिक-सांस्कृतिक बैठकों का अभाव हो गया है, और रहमान फाउंडेशन जैसी संस्था इस कमी को भरने का सराहनीय प्रयास कर रही है।” Read More...
आखिर में, सिंदूर की सौगंध एक प्रतीक है - वह प्रतीक जो हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक वादा है Read More...
Islamic legal rulings and regulations regarding electronic games - حلال کی صنعت کے بعض نئے مسائل
नए मसलों के समाधान में इस्तिस्हाब (पूर्व स्थिति की निरंतरता) के सिद्धांत का प्रयोग Read More...