ईद मिलादुन्नबी के शुभ अवसर दरगाह शाहर्ज़ान में शाने नबी पर व्याख्यान एवं प्रसिद्ध लेखक डॉ.अजय मालवीया बहार की लिखित ग़ज़ल संग्रह “एहसास की खुशबू” का विमोचन
प्रख्यात लेखक डॉ. अजय मालवीया बहार इलाहाबादी का ग़ज़ल संग्रह "एहसास की खुशबू" का विमोचन।
ईद मिलादुल नबी के मौक़े पर साहित्य अकादमी नई दिल्ली में उर्दू भाषा के संयोजक जनाब चंद्र भान ख्याल साहब ने किया।
प्रख्यात लेखक डॉ.अजय मालवीया बहार इलाहाबादी का ग़ज़ल संग्रह “एहसास की खुशबू” का विमोचन।

MPNN NEWS
पटना – पिछले दिनों ईद मिलादुल नबी के मौक़े पर दरगाह शाह अर्ज़ान सुल्तानगंज पटना में नबी साहब के जीवन एवं उनके कार्यकाल पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें भारत प्रख्यात स्कॉलर्स एवं उर्दू लेखक और शायरों को आमंत्रित किया।


इस अवसर पर उर्दू एवम् हिन्दी भाषा के उत्तर आधुनिकता काल के प्रख्यात साहित्यकार, आलोचक, शोधकर्ता,अनुवादक, विचारक, भाषा वैज्ञानिक एवम शायर डॉ अजय मालवीय बहार इलाहाबादी के उर्दू ग़ज़ल संग्रह “एहसास की खुशबू” का विमोचन दरगाह शाह अरजानी पटना में ईद मिलादुल नबी के मौक़े पर साहित्य अकादमी नई दिल्ली में उर्दू भाषा के संयोजक जनाब चंद्र भान ख्याल साहब ने किया। इस समारोह की अध्यक्ष्ता क़ौमी तंजीम उर्दू अखबार के सम्पादक जनाब सैय्यद मोहम्मद असद फरीदी ने किया। इसमें विशिष्ट अतिथि तसदीक अख़बार के सम्पादक डॉक्टर रेहान गनी और सुविख्यात उर्दू शायर जनाब खुर्शीद अकबर रहे। इस विमोचन समारोह का आयोजन दरगाह शाह अरजानी पटना के सज्जादा नशीन प्रोफेसर सैय्यद हसीन अहमद ने किया। इस विमोचन समारोह में डॉक्टर अजय मालवीय के ग़ज़ल संग्रह “एहसास की खुशबू” पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। मुख्य अतिथि जनाब चंद्र भान ख्याल ने डॉक्टर अजय मालवीय के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर हसीन अहमद ने कहा कि यह ग़ज़ल संग्रह भारतीय समाज को एक नई दिशा एवम दशा प्रदान करेगी। सैय्यद मोहम्मद असद फरीदी ने कहा कि यह ग़ज़ल संग्रह एहसास की खुशबू से हिंदुस्तान के मिट्टी की खुशबू और राष्ट्रीय एकता की झलक साफतौर पर दिखाई देती है। प्रख्यात साहित्यकार और शायर जनाब खुर्शीद अकबर ने डॉक्टर अजय मालवीय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनको हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, संस्कृत, बांग्ला, पंजाबी, फ़ारसी एवम् अरबी भाषा का ज्ञान है। इन्होंने उर्दू भाषा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पी एच डी की डिग्री प्राप्त की है। वर्तमान में वरिष्ठ उर्दू प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं और अध्यापन का कार्य कर रहे हैं।। इनकी अब तक हिंदी तथा उर्दू भाषा में इक्कीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उर्दू भाषा में इनकी प्रमुख पुस्तकों में उर्दू में हिन्दू धर्म, उर्दू सीखें, श्रीमद् भगवत गीता, वैदिक अदब और उर्दू, प्रेम चंद स्वानेह ब तस्वीर, है राम के वजूद पे हिंदुस्तां को नाज़, नई फिक्रियाती जिहात, नंद किशोर विक्रम शख्सियत और फिक्रो फन, जदीदियत के अलंबरदार शमसुर रहमान फारुकी, तखलिकात १, तखलिकात २, एहसास की खुशबू और गुबार ए फिक्र प्रकशित हो चुकी हैं। हिन्दी में सीताराम, उर्दू में रामकथा और ज़र्द मौसम का सफ़र प्रकशित हो चुकी हैं। लगभग डेढ़ सौ शोधपत्र एवम गज़लें विश्व की पत्र एवम पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा दो दर्जन से अधिक सेमिनारों में अपना शोधपत्र एवम व्याख्यान प्रस्तुत कर चुके हैं। उर्दू अख़बार तसदीक के सम्पादक डॉक्टर रेहान गनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

