सूफी संतों का आस्ताना और गन्द का खजाना?
जबकी कई प्रदेशो से आने वाले ज़ायरीन (श्रद्धालु) आज भी खुले में सोने को मज़बूर हैँ, शौच एवं जल की सुचारु सुविधा ना होने के कारण दरगाह के पिछले हिस्से में मौजूद जलाशय में जाना पड़ता है
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