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#India

कौन जानता है की मौत कहां खड़ी है और दलदल कहां है – रोज़गार की तलाश में तो निकलना ही पड़ता है।

भारत को अगर सच्चे मायनों में “विश्वगुरु” बनना है, तो पहले उसे अपने युवाओं को गुरबत, ग़ुलामी और गोली से आज़ादी दिलानी होगी।
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एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

आखिर में, सिंदूर की सौगंध एक प्रतीक है - वह प्रतीक जो हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक वादा है
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क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है? सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद

सोचिए, अगर कोई कैमरा न हो, कोई दर्शक न हो, कोई ताली बजाने वाला न हो—क्या तब भी आप वही मदद करेंगे? यह प्रश्न हमारे भीतर झाँकने की ज़रूरत को इंगित करता है।
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