(परंपरा से आतंक तक)

रैगिंग को ख़त्म करने के लिए, एक बहुआयामी रणनीति, कठोर कानूनी प्रवर्तन, गुमनाम रिपोर्टिंग प्रणाली और त्वरित दंडात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है। मज़बूत सलाह नेटवर्क, आवश्यक संवेदीकरण कार्यक्रम और दयालु सहकर्मी बातचीत को प्रोत्साहित करना निरोध…
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मगध के गांधी स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी सैयद फ़िदा हुसैन

फ़िदा हुसैन सिर्फ आंदोलनकारी ही नहीं थे, बल्कि एक क्रांतिकारी पत्रकार भी थे। उन्होंने “चिंगारी” नामक पत्रिका निकाली, जिसमें अंग्रेज़ी हुकूमत के अत्याचारों को उजागर किया जाता था।---------------------------------------------
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काँसिल की ओर त्रिदिवसीय सेमिनार – मर्ग़े बिस्तर पर कराहती उर्दू का मातम या उत्सव?

भारत सरकार का उर्दू महकमा फ़रोगे उर्दू ज़बान काउंसिल का त्रिदिवसीय सम्मेलन मर्ग़े बिस्तर पर कराहती उर्दू का मातम या उत्सव?
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राजस्थान हुकूमत का फैसला, उर्दू की गूंज को दबाने की साज़िश:

ज्ञात हो कि उर्दू प्रशिक्षण को बंद करने का निर्णय न केवल शिक्षा संस्थानों पर हमला है, बल्कि यह हमारे सभ्यता सांस्कृतिक और सांझी विरासत को खत्म करने का एक मास्टर प्लान भी है।
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साफ होनी चाहिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दिमागी गंदगी?

यदि आप सोचते हैं कि हमें ऐसे घृणित 'मजाक' को नजरअंदाज कर देना चाहिए और केवल 'वास्तविक अपराधों' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तो आप यह समझने में विफल हैं कि समाज कैसे काम करता है।
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विस्डम ग्रुप ऑफ स्कूल एवं आईएसएलडी द्वारा 38 वाँ वार्षिक उत्सव समारोह का आयोजन।

यदि गरीब पिछड़े मां अपने बच्चों की भविष्य बदलने के लिये प्रण करलेगी तो इस देश का भविष्य बदल जायेगा सुरक्षित और विकसित होगा।
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क्या जघन्य अपराधियों की न सुनी जाये पैरोल की अर्ज़ी?

यह कैदी की सामाजिक पुनर्प्राप्ति के लिए एक उपकरण से अधिक कुछ नहीं है। हालाँकि, हाल के वर्षों में, इस विचार में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव आया है
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