बदरे आलम रह. की मजार पर मुस्लिम डेवलपमेंट के सदस्यों ने की चादरपोशी
तंजीम अहले सुन्नत वल जमायत के लोगों ने भी मांगी अमन-शांति की दुआ।
बिहारशरीफ शहर एक ऐसी जगह है, जहां हर दौर में सुफिया-ए-कराम दूर-दराज से केवल दीन की तबलीग के लिए आते और अपने फयूज व बरकात से लोगों को नवाजते रहते थे।
बदरे आलम रह. की मजार पर मुस्लिम डेवलपमेंट के सदस्यों ने की चादरपोशी

बिहारशरीफ, एस एम आलम,
मखदूम शेख शर्फ उद्दीन अहमद यहिया मनेरी रह. के दौर के बुजुर्गों में शामिल हजरत पीर बदरुद्दीन बदरे आलम जाहदी रह. के आस्ताने पर गुरुवार को उर्स का आयोजन किया गया। इसमें नालंदा के अलावा नवादा, गया, जहानाबाद, पटना, शेखपुरा व अन्य कई जिलों के अकीदतमंदों ने शिरककत की। हजरत जाहदी रह। की मजार पर सबसे पहली चादरपोशी उनके वंशज सह साहबे सज्जादानशीं सैयद महफूज आलम की ओर से की गई। श्री आलम के घर पर द्वारा चादरपोशी से पहले सुबह की नमाज के बाद कुरआनख्वानी उसके बाद मीलाद का आयोजन किया गया। जोहर की नमाज के बाद उनकी ओर से मजार पर पहली चादरपोशी की गई।


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श्री आलम ने बताया कि उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने चादरपोशी की। खासतौर से तंजीम अहले सुन्नत वल जमाअत, मुस्लिम डेवलपमेंट कमेटी, खानकाह सूफी एसोसियन व अन्य संगठनों ने चादरपोशी कर अल्लाह तआला से सूबे में खुशहाली, अमन, शांति, भाईचारा व आपसी प्रेम के लिए दुआएं मांगी। उन्होंने बताया कि जोहर की नमाज के बाद शुरु हुआ चादरपोशी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। इस दौरान मजार पर चादरपोशी करने वालों में खादिम-ए-मखदूम एैनुल होदा, सदरुल होदा, मो. सोहैल, मो. मनौव्वर, हाफिज तौसीफ, हाफिज महताब चांदपुरवी, तालिब मलिक, सैयद जाकिर हसन, रुमी खान, जमील अशरफ जमाली के अलावा सैंकड़ों लोग शामिल रहे।
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उन्होंने बताया कि बिहारशरीफ शहर एक ऐसी जगह है, जहां हर दौर में सुफिया-ए-कराम दूर-दराज से केवल दीन की तबलीग के लिए आते और अपने फयूज व बरकात से लोगों को नवाजते रहते थे। उन्हीं बुजुर्गों में हजरत पीर बदर उद्दीन बदरे आलम जाहदी रह. भी एक हैं। कहा जाता है कि बाबा शेख शर्फ उद्दीन अहमद यहिया मनेरी रह. के बुलावा पर वे मेरठ से बिहारशरीफ आए थे। लेकिन जब तक हजरत पीर बदर उद्दीन बदरे आलम जाहदी रह. बिहारशरीफ पहुंचे तब तक हजरत मखदूम उल मुल्क का वेसाल हो चुका था। कहा जाता है कि जाहदी रह. बिहार के अलावा यूपी और बंगाल के लोगों के बीच भी काम किया था। बहरहाल गुरुवार की देर शाम मजार पर दुआ व फातेहाख्वानी के बाद उर्स का प्रोग्राम समाप्त किया गया।

