बिहारशरीफ शहर एक ऐसी जगह है, जहां हर दौर में सुफिया-ए-कराम दूर-दराज से केवल दीन की तबलीग के लिए आते और अपने फयूज व बरकात से लोगों को नवाजते रहते थे। Read More...
कलम अब ज़िम्मेदार हो - साहित्य, पत्रकारिता, मीडिया और सोशल स्पेस — ये सब लोकतंत्र की रीढ़ हैं। लेकिन जब यही प्लेटफॉर्म विदेशी एजेंडों या राजनीतिक नफ़रत से ग्रस्त हो जाएं, तो उन्हें शुद्ध करना ही राष्ट्र की सुरक्षा का हिस्सा बन जाता है। अब… Read More...
आज स्वर्गीय श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि अवसर पर दुआओं की की दरखास्त ! अल्लाह उनकी मग़फिरत फरमाये और जन्नत उल फिरदौस मे आला मुक़म आता करे - अमीन! Read More...
इतिहास गवाह है कि बिहार ने हर कठिन परिस्थिति में अपनी राह खुद बनाई है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या सामाजिक सुधार की बात, बिहारवासियों ने सदैव अपने संघर्ष से मिसाल पेश की है। Read More...