आज  स्वर्गीय श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि के अवसर पर दुआओं की की दरखास्त

स्वर्गीय  श्री मंज़ुरुल हक बहुत ही दयावान थे, वह हमेशा बिना भेद भाव के गरीबो की निस्वार्थ मदद करते रहे।

आज  स्वर्गीय  श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि अवसर पर दुआओं की की दरखास्त ! अल्लाह उनकी मग़फिरत फरमाये और जन्नत उल फिरदौस मे आला मुक़म आता करे – अमीन!

आज  स्वर्गीय  श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि के अवसर पर दुआओं की दरखास्त !

अल्लाह उनकी मग़फिरत फरमाये और जन्नत उल फिरदौस मे आला मुक़म आता करे – अमीन!

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एस. ज़ेड. मलिक
8 मई 2022 आईजी पुलिस सेवानिवृत्ति स्वर्गीय श्री मंज़ुरुल हक 8 मई 2022 को कोविट 19 के शिकार हुए और मौत ने उन्हे हमेशा के लिए अपने आगोश मे लेलिया और वह अपने मालिक हक़ीक़ी से जा मिले, इस 8 मई को उकई बरसी है तमाम मोमिनों से गुजारिश है की उके मगफिरत की दुआ करें – अल्लाह उन्हे जननतुल फ़िरदौस मे आला मुकाम आता करे – आमीन।         
स्वर्गीय श्री मंज़ुरुल हक युवा सहायक कमांडेंट, CRPF ने 1974 से 1975 तक सिक्किम के पहले प्रधान मंत्री श्री काजी लेंसप दोरजी को सम्मानित करने वाले गार्ड का संचालन किया। और बाद में सिक्किम को भारत में विलय के बाद राज्य का दर्जा दिया गया जिसका इत्तिहासिक विलय दस्तावेज़ में उनके नाम का उललेख है जो दस्तावेज़ मुख्यमंत्री आवास पर अभी मौजूद है।
 वह 1973 में भारत सरकार द्वारा चुने गए मलिक कम्युनिटी के प्रथम श्रेणी के पहले अधिकारी थे।
16 मई 1975 को, सिक्किम भारतीय संघ का 22 वां राज्य बन गया, और राजशाही को समाप्त कर दिया गया और नये राज्य के समावेश को सक्षम करने के लिए, भारतीय संसद ने भारतीय संविधान में संशोधन किया।
श्री मंज़ुरुल हक ने अपने सुपरनेशन से चार साल पहले डीआईजी, सीआरपीएफ, दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) के रूप में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और सुप्रीम कोर्ट में अपने चार अन्य बैचमेट्स के साथ देरी से पदोन्नति के बारे में एक मामला दायर किया और अंत में 10 साल के मुकदमेबाजी के बाद मामले को जीत लिया और वे सभी सभी लाभों के साथ आईजी पुलिस के  पद के लिए सेवानिवृत्ति के रूप में पदोन्नत मिली।
स्वर्गीय मंज़ूरल हक़ खानदानी शिक्षित रईस लोगों में हैं, उनकी भतीजी पिछले वर्ष आईएएस की टॉपर हुई, उनके बड़े भाई महफ़ूज़ल हक़ वही उच्चतर शिक्षित एवं प्रिंसिपल के पद से सेवनिर्वित है, छोटे भाई प्रो. आसमी रज़ा अभी दिल्ली विश्विद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं, और इनसे छोटे भाई तनवीर उल हक एक बड़े बिजनेस मैन जो आसाम में हैं। इनका ददिहाल और ननिहाल दोनों नालंदा ज़िला के प्रसिद्ध ज़मीनदार और शिक्षित बस्ती  ददिहाल बिरनावां और ननिहाल अंढव्हस से सम्बंध है।
उनके जानने वालों का मानना है कि वह बड़े उदारवादी स्वाभाव के थे, वह शिक्षित और जो कुछ करने की चाहत रखने वाले नौजवानों को तरजीह देते थे। अपने पद पर रहते हुए निस्वार्थ न जाने कितने गरीब परिवारों के घरों के चूल्हे जलवाए, नौजवानों को बिना भेद भाव के नौकरी पर बहाल कर उनके परिवार को खुशहाल बनाया। उनके अनगिनत मिसाल हैं उनके लगाए हुए अभी रिटायर पर्सन अपने परिवार के साथ दिल्ली में खुशहाल जीवन बसर कर रहे हैं। 
ZEA
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