बिना ऑपरेशन के घातक बीमारियों का प्रकृतिक पद्धति द्वारा शर्तिया इलाज ।
गरीबो के लिए घातक बीमारियों का इलाज अब संभव, प्रकृतिक पद्धति द्वारा शर्तिया इलाज।
जहां एलोपैथी द्वारा घातक बीमारियां लाइलाज जानलेवा साबित हो रहा है वहीं आयुर्वेदा और प्राकृतिक संसाधनों द्वारा इलाज संभव और आसान सा हो गया है।
घातक बीमारियों का प्रकृतिक पद्धति द्वारा शर्तिया इलाज ।

एस. ज़ेड. मलिक – MPNN-NEWS/AINA INDIA
नई दिल्ली – आज भारत क्या विश्व भर मे वृद्धाओं के तुलना में अधिकतर युवाओं में हार्ट अटैक, डाइबिटीज़ – ब्लड शुगर, हाई ब्लडप्रेशर, कैंसर ग्रस्त, किडनी का फेल होना, लिवर डैमेज होना, घुटनो का खराब होना, स्पाइनल दर्द, मस्कल दर्द, नसों में खिंचाव, सर्वाइकल, महिलाओं में थाइराइड, माइग्रेन जैसी अनेकों घातक बीमारियां गलत खान-पान एवं गलत अचार विचार व्यवहार व रहन-सहन के कारण समाज मे बड़ी तेजी से पनप रही है जिस का इलाज इलोपतिथिक द्वारा घातक बनता जा रहा है, ऐसी स्थिति में भारतीय पुरानी पद्धति आयुर्वेदा एवं प्रकृतिक शुद्ध वातावरण शक्ति और योगा द्वार उपचार आसान किया जा रहा है।


इस पद्धति से शर्तिया इलाज की जानकारी देने के लिये 22, अप्रैल 2024 को एक दिवसीय नई दिल्ली के कन्स्टीट्यूसनल क्लब में हिम्स अर्थात Hospital & institute of integrated Medical Sciences अस्पताल एवं एकीकृत चिकित्सा विज्ञान संस्थान का मेडिकल अकादमी, सनराइज विश्वविद्यालय अलवर एवं चवण फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर द्वारा संयुक्त पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के प्रसिद्ध नेचरोपैथी डॉक्टर्स एवं पर्यवरण विद, तथा योगगुरुओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर सनराइज विश्विद्यालय के कुलपति एवं अध्यक्ष डॉ. कृष्णा नाथ पांडे, फाउंडेशन के चेयरमैन एवं पार्टनर सुधा आयुर्वेद क्लीनिक और अस्पताल के डॉ. सुनील चवण, आयुर्वेद कॉलेज के आचार्य मनीष कुमार, एवं हिम्स के डॉ. बिस्वरूप राय चौधरी , ने सभा को सम्बोधित किया।
इस अवसर पर POEM अर्थात प्रोटोकॉल ऑफ एमेरजेंसी मेडिसिन, अर्थात आपातकालीन चिकित्सा के सुरक्षित नियम पर डॉ. बिस्वरूप राय चौधरी द्वारा लिखित एक पुस्तक का विमोचन कर एवं प्रथम उपचार चिकित्सक किट वितरित किया गया।


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