सत्ता की लालच में प्रधानमंत्री की गिरती गरिमा।
धर्म के आधार पर मुसलमानो को आरक्षण नहीं देंगे - प्रधानमंत्री -
क्या संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान है ? नहीं ! तो फिर क्यूँ, प्रधानमंत्री जी मुसलमानों धर्म की आधार पर आरक्षण देने की बात कर रहे हैं?, और अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाली सारी पार्टियां मूकदर्शक बनी हुई हैं।
सत्ता की लालच में प्रधानमंत्री की गिरती गरिमा।

धर्म के आधार पर मुसलमानो को आरक्षण नहीं देंगे – प्रधानमंत्री –



एस. ज़ेड. मलिक (पत्रकार)
70 वर्षों से आज तक हिदुस्तान में मुसलमानो को डर और बहलावा के सिवा सरकार से मिला क्या ? 1990 मंडल कमीशन लागू होने के बाद दोयम दर्जे का आरक्षण दिया गया क्या इसका विरोध किसी मुसलमान ने किया क्या? और इसका लाभ कितने मुसलामानों ने उठाया ?
आइये बताते देखिये ओबीसी आरक्षण कब मिला और इस ओबीसी का लाभ किसने उठाया?
7 अगस्त, 1990 को पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने संसद को बताया कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण लागू कर रहे हैं. इसके 6 दिन बाद 13 अगस्त, 1990 को इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई।
दरअसल, आज जो आरक्षण प्रणाली मौजूद है, वह सही मायने में 1933 में शुरू की गई थी जब ब्रिटिश प्रधान मंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने ‘सांप्रदायिक पुरस्कार’ प्रस्तुत किया था। इस पुरस्कार में मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन, यूरोपीय और दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रावधान किया गया।
मंडल आयोग के उद्देश्य
मंडल आयोग के निष्कर्ष
आयोग ने एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें सर्वेक्षण करना, आंकड़े एकत्र करना, तथा आरक्षण लाभ के हकदार समुदायों की पहचान करने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श करना शामिल था।
आयोग द्वारा की गई सिफारिशें
कार्यान्वयन
आखिर इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री को इस देश के मुसलमानों से दुश्मनी क्यूँ है?
अब सवाल यह भी है की इंडिया गठबंधन अपने आपको और देश को तानाशाह के प्रकोप कैसे बचाएगी ?
इससे बचने का बस एक ही उपाए है – इंडिया गठबंधन के कुछ लोग चुनाव परिणाम के दिन कॉउंटिंग में रहें और अपनी गिद्ध दृष्टी जमाये रखें 300 से एक भी पर्ची फालतू हो तो उसे वीवीपैट को रिजेक्ट करने का उसी समय आवाज़ उठायें और दुसरी तरफ चुनाव आयुक्त को घेर का शान्ति पूर्ण धरने पर बैठ जाएँ, ताकि चुनाव आयुक्त को सत्तारूढ़ पार्टिओं के मनमानी को रोकने पर मजबूर होना पड़े। तभी सम्भव है इंडिया गठबंधन को सत्ता में आना। वरना बारी बारी से सभी को जेल – रेल में जाना पड़ेगा।


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