JP के आपातकाल दिवस पर गहन विचार गोष्ठि नई दिल्ली के जीपीएफ में सम्पन्न

25 जून आपातकाल दिवस पर विचार संगोष्ठी संपन्न, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का आह्वान अभय सिन्हा

25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों को लगभग समाप्त कर दिया गया था,

सम्बन्धित समाचार देखने के लिए इसमे दिये गये लिंक पर क्लिक करेंhttp://www.ainaindianews.com 

25 जून आपातकाल दिवस पर विचार संगोष्ठी संपन्न, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का आह्वान
अभय सिन्हा

AINGM//संवादाता

Addsaudi01

नई दिल्ली। 25 जून को आपातकाल दिवस के अवसर पर गांधी शांति प्रतिष्ठान, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र द्वारा एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का सफल आयोजन संस्था के महासचिव अभय सिन्हा एवं संस्था अन्य पदाधिकारीयों के नेतृत्व में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से आए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु मीनू ठाकुर के नेतृत्व में उनके शिष्यों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक शास्त्रीय नृत्य एवं गणेश वंदना से हुआ। इसके उपरांत भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया, एएएफटी (AAFT) के अध्यक्ष संदीप मारवाह , लोकनायक जयप्रकाश अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र के महासचिव अभय सिन्हा, प्रख्यात लोकगायिका डॉ मालिनी अवस्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत उद्घाटन किया।

कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह, प्रख्यात लोक गायिका एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत मालिनी अवस्थी, एएएफटी (AAFT) के अध्यक्ष संदीप मारवाह, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण के निकटतम सहयोगी रहे कुमार प्रशांत, बिहार की पूर्व विधायक रश्मि वर्मा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार कोंडले चिनप्पा तथा नागालैंड हाउस के पूर्व उपायुक्त ज्योति कलश सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

अपने संबोधन में श्री सत्यनारायण जटिया ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों को लगभग समाप्त कर दिया गया था, नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगा दिया गया और असहमति के स्वरों को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए समाज का जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है।

कुमार प्रशांत ने आपातकाल के दौर की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि उस समय हजारों-लाखों लोकतंत्र समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले लोकतंत्र बचाओ आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए जनता का आह्वान किया था—

“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।”

उन्होंने कहा कि यह केवल एक कविता की पंक्ति नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए जनता की सामूहिक चेतना और संघर्ष का प्रतीक बन गई थी।

अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आपातकाल का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखने की सीख देता है। वक्ताओं ने युवाओं से संविधान के आदर्शों को आत्मसात करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के महासचिव अभय सिन्हा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराने और लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में संस्था के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री भोला नाथ निगम, श्री विनय कुमार खरे, श्री अनिल कुमार सक्सेना, श्री कुमार राकेश, श्रीमती कामना झा, कृष्ण कन्हैया, दुर्गेश शर्मा, श्री महेश सक्सेना, श्री शूल पानी सिंह , श्रीमती सुनेत्रा को अंगवस्त्र पहना कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन कुमार सत्यम और आशी चौधरी ने किया।

सम्बन्धित समाचार देखने के लिए इसमे दिये गये लिंक पर क्लिक करेंhttp://www.mpnn.in

ZEA
Leave A Reply

Your email address will not be published.