नवनिर्मित सड़क के नामकरण को लेकर शहिद के पुत्र और ग्रामीणों ने डीएम को लिखा पत्र

1942 को अंग्रेज हुकूमत की गोली से घायल इस वीर शहीद को तत्कालीन मजिस्ट्रेट के आदेश पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया

उल्लेखनीय है कि शहादत से पूर्व अंग्रेज हुकूमत ने सन 1932 ईस्वी में 6 महीने तक के लिए मल्लीक वायजुल हक को जहानाबाद जेल में कैद रखा

 वीर स्वतंत्रता संग्राम के प्रोयुद्धा शहीद वीर मलिक वायेज़ुल हक़ के नाम से हज़ारों ग्रामीणों द्वारा एक पथ की मांग।

MPNN -AINA INDIA

कुर्था – स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी शहिद मल्लीक वायजुल हक के 85 वर्षीय वृद्ध पुत्र नसिमुलहक तथा मेदिनीपुर बड़हिया गांव के दर्जनों ग्रामीण ने अरवल के जिलाधिकारी को एक हस्ताक्षर युक्त पत्र भेजकर प्रखंड क्षेत्र के नवनिर्मित हरपुर मेदिनीपुर बड़हिया पथ के नामकरण शहिद मल्लीक वायजुलहक के नाम पर करने की माँग की है।

Addsaudi01

शहिद के पुत्र तथा ग्रामीणों ने भेजे गये हस्ताक्षर युक्त पत्र में बताया कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दरम्यान कुर्था थाना पर तिरंगा फहराने के क्रम में अंग्रेज़ हुकुमत के गोली के शिकार मल्लीक वायजुल हक महज 29 वर्ष की अल्प आयु में शाहिद हो गये थे। उल्लेखनीय है कि शहादत से पूर्व अंग्रेज हुकूमत ने सन 1932 ईस्वी में 6 महीने तक के लिए मल्लीक वायजुल हक को जहानाबाद जेल में कैद रखा इसके पश्चात जहानाबाद जेल से 3 महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए उन्हें पटना के कैंप जेल में शिफ्ट किया गया जबकि पुण:17 नवंबर 1942 को अंग्रेज हुकूमत की गोली से घायल इस वीर शहीद को तत्कालीन मजिस्ट्रेट के आदेश पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और दो माह की अवधि पूर्ण होने के होने पर उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए बेल पर जेल से छोड़ दिया गया। इसके पश्चात कुछ ही दिन बाद उन्होंने महज 29 वर्ष की अल्प आयु में ही देश की आजादी की खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। डीएम को लिखे गये पत्र में शहिद के पुत्र तथा ग्रामीणों ने कहा है कि हमलोगों की हार्दिक इच्छा है की नवनिर्मित हरपुर मेदनीपुर बड़हिया पथ का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम के इस अमर सेनानी के नाम पर किया जाये ताकि आने वाली पीढी और नस्ल ये जान सके कि हमारे पूर्वजों ने देश की आज़ादी की खातिर कितनी बड़ी कुर्बानी दी है।

ZEA

Comments are closed.