वक़्फ़ बिल पर हंगामा क्यूँ? अपने गृहबान मे झांके मुसलमानों रहबर।
काश! की वक़्फ़ मिल्कियत के निगहबान पूर्वजों के द्वारा वक़्फ़ की गई मिल्कियत को अगर गरीब बेघर मुसलमानों को किराए पर या लीज़ पर दिए होते तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलता
आज नौबत यह आ गई कि वक़्फ़ को बचाने के लिए सब लोग आ गए वक़्फ़ की जो यह नौबत आई उसमें मुख्य कारण हमलोग ख़ुद है , सुनकर पढ़कर मेरी बात जरूर बुरी लगी होगी
ज़मीं खा रहे है निगहबां, हुक्मरां – मातम माना रहे हैं मुर्दे मुसलमां।।
वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से लाए गए वक्फ संशोधन बिल

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी
वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से लाए गए वक्फ संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया है. इसे लेकर जेपीसी की अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं. इस दौरान जेपीसी की ओर से आम जनता से वक्फ संशोधन बिल को लेकर उनके सुझाव मांगे गए थे. इस मामले में जेपीसी के सामने अब तक करीब 84 लाख सुझाव ईमेल के जरिए आ चुके हैं. इसके साथ ही लगभग 70 बॉक्स लिखित सुझावों से भरे हुए भी संयुक्त संसदीय समिति के पास आए हैं. संयुक्त संसदीय समिति की अगली बैठक 19 और 20 सितंबर को होगी. समिति बिल पर विचार विमर्श करने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. वक्फ बोर्ड की संपत्ति को ‘वक्फ परिसंपत्ति’ घोषित करने और उस पर नियंत्रण करने की हमदर्द वोह है जो असल मे वक़्फ़ की हिफाज़त चाहते हैं और वही लोग आज आगे है वक़्फ़ को बचाइए मैं 12 साल से लगातार वक़्फ़ के मुद्दे को लेकर आवाज़ उठाते आया पर कोई न सुना आज नौबत यह आ गई कि वक़्फ़ को बचाने के लिए सब लोग आ गए वक़्फ़ की जो यह नौबत आई उसमें मुख्य कारण हमलोग ख़ुद है , सुनकर पढ़कर मेरी बात जरूर बुरी लगी होगी वक़्फ़ में बहुत बड़े पैमाने पर चोर लुटेरे और सरकार के चमचे घुसे हुए थे इन्होंने बचाने से ज़यादा अपनी जायदाद बनाने पर अपने बच्चों के लिए प्रॉपर्टी जमा करने पर धेयान दिया ,हमारे बुजुर्गों ने विरासत के रूप में वक्फ बोर्ड की जो अरबों- खरबों की जमीन मस्जिदों,मदरसों, कब्रिस्तान,खानकाह, दरगाह,मकतब स्कूल कॉलेज के लिए दान की थी हमारे बुजुर्गों ने जमीन वक्फ की हमारी आने वाली नस्लों के लिए हम वक्फ बोर्ड तरमीम शुदा बिल की मुखालफत करते हैं वक्फ बोर्ड की जमीन हम पर वाजिब नहीं बल्कि हम वक्फ बोर्ड जमीन के वारिस है वक्फ बोर्ड के बारे मे सरकार को कुछ पता नहीं है इन संशोधनों से ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि दीगर मज़हबों के मज़हबी, सक़ाफ़ती और जायदाद के हुक़ूक़ पर असर पड़ेगा और एक ग़लत नज़ीर क़ायम होगी। वक्फ बोर्ड वो संस्था है जो अल्लाह के नाम पर दान में दी गई संपत्ति का रख-रखाव करता है। जैसे इस्लाम मजहब मानने वाले जब अपनी किसी चल या अचल संपत्ति को जकात में देते हैं तो वो संपत्ति तभी से ‘वक्फ’ कहलाती है। वाकीफ बोर्ड की मनशा ये होती है के मेरे ज़िन्दगी में य़ा मरने के बाद मेरे property ज़िसको मैने वकफ किया उससे गरीबो की भलाई हो ,बच्चियों की शादी हो और दुसरे welfare का काम हो ज़िसे फी सबिलिल्लाह कहते हैं और ज़िस्की देख रेख वकफ बॉर्ड करती है लेकिन इसके सही protector अल्लाह हैं इसपर बुडी नजर रखने वाले य़ा इसको हडपने वाले य़ा इसे बेचने वालों को इसी दुनिया मे सजा मिल जाती है क्यूंकी वाकीफ की मनशा ही यही होती है कि इस जयदाद से यतीमो और गरीबो को मदद पहूँचे
सैय्यद आसिफ इमाम काकव

