*चुनावी ड्यूटी में व्यवधान उत्पन्न करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार होगी कड़ी कार्यवाई- मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल*
आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन तथा मतदाताओं को प्रलोभन देने पर की जाएगी सख्त कार्रवाई
लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं के लिए व्यक्तियों को पंजीकृत करने से जुड़ी किसी भी गतिविधि को तुरंत बंद कर दें अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चुनावी ड्यूटी में व्यवधान उत्पन्न करने वालों और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन तथा मतदाताओं को प्रलोभन देने पर की जाएगी सख्त कार्रवाई -मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल

*नई दिल्ली, 2 अक्तूबर -* हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री पंकज अग्रवाल ने कहा कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और मतदाताओं को प्रलोभन देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में हुए लोकसभा के आम चुनाव के दौरान आयोग को ऐसे उदाहरण मिले, जहां कुछ राजनीतिक दल और उम्मीदवार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं, जो वैध सर्वेक्षणों और लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं और व्यक्तिगत लाभों के लिए व्यक्तियों को पंजीकृत करने के पक्षपातपूर्ण प्रयासों के बीच की रेखा को धुंधला कर देते हैं। ये प्रयास सर्वेक्षण करने, सरकार की मौजूदा योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने, संभावित व्यक्तिगत लाभ योजनाओं आदि से संबंधित पार्टी घोषणापत्र के बारे में जागरूकता पैदा करने की आड़ में किए जाते हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि समाचार पत्रों में विज्ञापनों के माध्यम से व्यक्तिगत मतदाताओं से मोबाइल पर मिस्ड कॉल देकर या टेलीफोन नंबर पर कॉल करके लाभ के लिए स्वयं को पंजीकृत करने का आह्वान किया जाता है। इसके अलावा, संभावित व्यक्तिगत लाभों का ब्यौरा देने वाले पैम्फलेट के रूप में गारंटी कार्ड का वितरण, साथ में एक फार्म संलग्न करना जिसमें मतदाताओं के नाम, आयु, पता, मोबाइल नंबर, बूथ संख्या, निर्वाचन क्षेत्र का नाम और संख्या आदि जैसे विवरण मांगे जाते है। यदि कोई ऐसा करता पाया जाता है तो जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 123 (1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 171 के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत मतदाताओं को खुद को पंजीकृत करने के लिए आमंत्रित करने/आह्वान करने का कार्य, मतदाता और प्रस्तावित लाभ के बीच एक संबंध की आवश्यकता की धारणा बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया प्रतीत होता है और इसमें एक विशेष तरीके से मतदान के लिए क्विड-प्रो-क्वो व्यवस्था उत्पन्न करने की क्षमता है जिससे यह प्रलोभन की ओर अग्रसर होता है। इसके अलावा, कभी-कभी ऐसे पैम्फलेट पर प्रकाशक का नाम नहीं होता है जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127 ए का सीधा उल्लंघन है।
श्री पंकज अग्रवाल ने बताया कि जबकि आयोग यह स्वीकार करता है कि सामान्य और सामान्य चुनावी वादे अनुमति के दायरे में हैं, ऐसे विशिष्ट और व्यक्तिगत लेन-देन के बारे में यह पाया गया हैं कि यह मतदाता को लुभाने की प्रकृति का लेन-देन है, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत मतदाताओं को भविष्य के लाभ के बदले में एक विशेष तरीके से मतदान करने के लिए लुभाना है जो कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(1) के तहत निषिद्ध गतिविधि है। यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 171 का भी उल्लंघन है जो रिश्वतखोरी से संबंधित है, जो चुनावों से संबंधित अपराध है।
इसलिए, आयोग सभी राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों या उनके एजेंटों या किसी भी अन्य व्यक्ति को निर्देश देता है कि वे किसी भी विज्ञापन (प्रिंट या डिजिटल स्पेस में), पर्चे, वेबसाइट, वेब या मोबाइल एप्लिकेशन, टेक्स्ट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (व्हाट्सएप आदि) संदेशों, मिस्ड कॉल, फॉर्म के वितरण, या ऑफ लाइन सर्वेक्षण फॉर्म या डिजिटल सर्वेक्षण आदि के बहाने व्यक्तिगत डेटा एकत्र करके लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं के लिए व्यक्तियों को पंजीकृत करने से जुड़ी किसी भी गतिविधि को तुरंत बंद कर दें। यदि उल्लंघन किया जाता है तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 171 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
श्री पंकज अग्रवाल ने बताया कि यदि ऐसा कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो जिला निर्वाचन अधिकारी वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेगा। इस बारे जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए है।
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*चुनावी ड्यूटी में व्यवधान उत्पन्न करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार होगी कड़ी कार्यवाई- मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल*
*किसी सरकारी अधिकारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने पर या हमला करने पर 10 साल तक की कैद की सजा का है प्रावधान*
*नई दिल्ली, 2 अक्तूबर* – हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री पंकज अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में हो रहे विधानसभा आम चुनाव 2024 के लिए मतदान पार्टियां 4 अक्तूबर को मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। चुनाव ड्यूटी पर जा रहे मतदान दल के कार्य में अगर कोई असामाजिक तत्व या राजनीतिक पार्टियां अपने प्रभाव के चलते उनकी ड्यूटी में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करते हैं तो उनके विरूद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मतदान केंद्र के अंदर यदि किसी व्यक्ति का आचरण सही नहीं है या पीठासीन अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करता है तो उसे ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारी द्वारा मतदान केंद्र से बाहर निकाला जा सकता है। उसके बाद भी यदि वह व्यक्ति पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बिना मतदान केंद्र में पुनः प्रवेश करता है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 132 के तहत उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और 3 माह की जेल या जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
*मतदान केंद्र में हथियार लेकर आने पर 2 साल की कैद की सजा का है प्रावधान*
उन्होंने बताया कि रिटर्निंग अधिकारी, पीठासीन अधिकारी, पुलिस ऑफिसर या कोई अन्य व्यक्ति जिसे मतदान केंद्र के अंदर शांति और व्यवस्था कायम रखने हेतु ड्यूटी पर तैनात किया गया हो, उन्हें छोड़कर यदि कोई व्यक्ति हथियार के साथ मतदान केंद्र में आता है तो उसे एक अपराध माना जाएगा। इसके लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 134 बी के तहत 2 साल की कैद या जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यदि पीठासीन अधिकारी को किसी कारणवश लगता है कि किसी व्यक्ति ने बैलेट पेपर या ईवीएम को मतदान केंद्र से बाहर हटाया/निकाला है तो वह उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है या पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार करने निर्देश दे सकता है या उसे ढूंढने के निर्देश दे सकता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135 के तहत उस व्यक्ति को एक साल की कैद या जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
*मतपत्र या ईवीएम पर लगे आधिकारिक चिह्न को धोखाधड़ी से नष्ट करने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान*
उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 136 के तहत चुनाव प्रतिबद्धता की दृष्टि से अपराध करने हेतु यदि कोई व्यक्ति किसी मतपत्र या ईवीएम या किसी मतपत्र या ईवीएम पर लगे आधिकारिक चिन्ह को धोखाधड़ी से विरूपित या नष्ट कर देता है या किसी मतपेटी में मतपत्र के अलावा कुछ भी डाल देता है, या प्रतीक/नाम/पर कोई कागज, टेप आदि चिपका देता है तो भी सजा का प्रावधान है। इस स्थिति में यदि यह अपराध चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी अधिकारी या क्लर्क द्वारा किया जाता है तो 2 साल की कैद या जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। यदि यह अपराध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो उसे 6 माह की कैद या जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए स्वेच्छा से साधारण या गंभीर चोट पहुंचाता है या हमला करता है तो उसे 10 साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता हैं।
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